न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने न्यायिक हिरासत में कैदियों द्वारा जानबूझकर खुद को नुकसान पहुंचाने और आत्महत्या के प्रयासों को कम करने के लिए केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन को एक परामर्शी जारी की है। आयोग ने पाया है कि अधिकांश कैदियों की अप्राकृतिक मौतें आत्महत्या के कारण होती हैं। इसलिए, इन आत्महत्याओं को रोकने के लिए, उनके मानसिक स्वािस्य्ते पर ध्यान देने के अलावा, आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि बैरकों के साथ-साथ शौचालयों को, जहां सबसे अधिक आत्महत्याएं होती हैं, उन वस्तुओं से मुक्त रखा जाना चाहिए, जिनका उपयोग फांसी के लिए किया जा सकता है, जैसे, लोहे की छड़ें/ग्रिल्स, पंखे, हुक या इसी तरह की अन्य वस्तुएं। कैदी से उसके परिवार के सदस्यों की मुलाक़ात और उनके साथ टेलीफोनिक संचार के माध्यिम से संपर्क को प्रोत्साहित करना एक और महत्वपूर्ण सिफारिश है।
आयोग ने अपने महासचिव देवेन्द्र कुमार सिंह के माध्यम से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों को एक पत्र लिखा है, जिसकी एक प्रति गृह मंत्रालय, पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो तथा सभी महानिदेशक, कारागार को भी भेजकर तीन महीने के भीतर आयोग द्वारा जारी परामर्शी में की गई सिफारिशों के कार्यान्वियन और उस पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
परामर्शी में केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा कार्रवाई के लिए ग्यारह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है। इनमें : रिक्तर पदों को भरना और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना, जेल कर्मचारियों और कैदियों को प्रशिक्षण देना, जेल में कैदियों के प्रवेश के समय उनके मानसिक स्वास्थ्य की जांच करना, जोखिम वाले कैदियों का पर्यवेक्षण और निगरानी करना, शमन के लिए एक सहयोगी ढांचा बनाना, कैदियों के बीच नशे की समस्या का मुद्दा, प्रासंगिक वैधानिक प्रावधान का अनुपालन, जेल हाउसकीपिंग, आगंतुक प्रणाली को सुदृढ़ करना और जेल वास्तुकला और उसके वातावरण में सुधार करना शामिल हैं।
कुछ अन्य महत्वपूर्ण सिफ़ारिशें इस प्रकार हैं:
शौचालयों और सतहों की सफाई के लिए उपयोग किए जाने वाले अपघर्षक और संक्षारक रसायन, जैसे फिनाइल, एसिड आदि, कैदियों की पहुंच से परे होने चाहिए;
इमारत के रखरखाव के लिए उपयोग किए जाने वाले उपकरण, जैसे रस्सियाँ, कांच, लकड़ी की सीढ़ियाँ, पाइप आदि, संबंधित जेल कर्मचारियों की सुरक्षित हिरासत में रखे जाने चाहिए;
कैदियों की चादरों और कंबलों की नियमित जांच और निगरानी की जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका उपयोग आत्महत्या का प्रयास करने के लिए रस्सियाँ आदि बनाने में न किया जाए;
जेल में ऐसे कृत्यों की संभावना वाले स्थान/क्षेत्र की पहचान की जाए और वहां पर सीसीटीवी लगाने सहित सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए;
प्रत्येक कैदी की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट में मानसिक स्वास्थ्य जांच को शामिल किया जाए;
जेल कर्मचारियों की मौजूदा रिक्तं पदों को विशेष रूप से जेल कल्याण अधिकारियों, परिवीक्षा अधिकारियों, मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सा कर्मचारियों की रिक्तियों को भरा जाना चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को शामिल करने के लिए उनकी संख्याच को उपयुक्त रूप से बढ़ाया जाना चाहिए;
समय-समय पर पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों (रिफ्रेशर कोर्स) के साथ जेल कर्मचारियों के बुनियादी प्रशिक्षण में मानसिक स्वास्थ्य साक्षरता का एक घटक शामिल किया जाना चाहिए;
प्रत्येक जेल बैरक में चयनित जेल कर्मचारियों को कार्डियोपल्मोनरी पुनर्वसन और प्राथमिक चिकित्सा (सीपीआर) प्रदान करने में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए, विशेष रूप से फांसी के प्रयास, खुद को काटे जाने से रक्तस्राव, या विषाक्त पदार्थों के सेवन से निपटने के लिए;
जेल कर्मचारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा में प्रशिक्षित एक ‘साथी’ कैदी की नियुक्ति;
प्रासंगिक नियमों के अनुसार कैदी द्वारा अपने दोस्तों या परिवार के साथ संपर्क के लिए पर्याप्त संख्या में टेलीफोन की उपलब्धोता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए;
जोखिम वाले कैदियों को आवश्यक आश्वासन, परामर्श और मानसिक सहायता देने के लिए उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क किया जाना चाहिए; कैदियों को भावनात्मक समर्थन प्रदान करने के लिए उनके परिवार के सदस्योंन को जेल में उनसे मिलने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए;
गेटकीपर मॉडल: (विश्व स्वास्थ्य संगठन, डब्ल्यूएचओ द्वारा तैयार), जेलों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने के लिए आत्महत्या के जोखिम वाले कैदियों की पहचान करने के लिए सावधानीपूर्वक चयनित कैदियों के प्रशिक्षण को लागू किया जाना चाहिए;
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और नशामुक्ति विशेषज्ञों के नियमित दौरों द्वारा कैदियों के बीच नशे की समस्या से निपटने के उपाय किए जाएं;
कैदियों को जीवन-कौशल-आधारित शिक्षा और योग, खेल, शिल्प, नाटक, संगीत, नृत्य जैसी गतिविधियाँ और उपयुक्त आध्यात्मिक और वैकल्पिक धार्मिक निर्देश प्रदान किए जाने चाहिए ताकि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक रूप से प्रसारित कर सकें और अपना समय व्यतीत कर सकें। यदि आवश्यक हो तो प्रतिष्ठित गैर सरकारी संगठनों की मदद से ऐसा किया जा सकता है;
अप-स्किलिंग, व्यावसायिक मार्गदर्शन और वित्तीय स्वतंत्रता के साधनों की सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए। लंबे समय से कुशल कैदियों को उद्यमिता के लिए सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा सकता है।
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