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जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने झारखंड के खूंटी जिले में पोषण माह गतिविधियों की शुरुआत की

मुख्य विशेषताएं :

जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की लाभार्थी आदिवासी महिलाओं से मुलाकात की तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण के लाभों पर प्रकाश डाला।
2018 में शुरू किए गए पिछले पोषण अभियान की अगली कड़ी के रूप में चौथा पोषण माह सितम्‍बर के महीने में मनाया जा रहा है।
जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से केन्‍द्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर कई गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
जनजातीय बहुल क्षेत्रों के भीतरी इलाकों में पोषण माह की गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
बिहार के नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड के आदिवासी बहुल क्षेत्र झीलरा गांव में पोषण परामर्श शिविर एवं पोषण संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
झारखंड के आदिवासी बहुल मुंडा और अग्रा मुंडा इलाकों में पोषण माह गतिविधियों का आयोजन किया गया।

जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने इस सप्ताह झारखंड के खूंटी जिले में एक कार्यक्रम के आयोजन के साथ जनजातीय कार्य मंत्रालय की पोषण माह गतिविधियों की शुरुआत की, जिसमें ‘‘सही पोषण देश रोशन’’ के संदेश के साथ एक संकल्‍प भी शामिल है। पोषण माह में आदिवासी महिलाओं का स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण पहलू है और आदिवासी महिलाओं के पोषण पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए, जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थियों से मुलाकात की तथा गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए पोषण के लाभों पर प्रकाश डाला।

2018 में शुरू किए गए पिछले पोषण अभियान की अगली कड़ी के रूप में चौथा पोषण माह नोडल मंत्रालय के तौर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ सितम्‍बर के महीने में आयोजित किया जा रहा है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एनीमिया को कम करने में पोषण के महत्व, बच्चों में पुरानी पोषण की कमी, जो उनके अस्तित्व, वृद्धि, शिक्षण, स्कूल में प्रदर्शन, अनुसूचित जनजातियों के बीच उत्पादकता को प्रभावित करती है आदि को ध्‍यान में रखते हुए केन्‍द्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर कई गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना बनाई है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय, उसके संगठनों और विभिन्न हितधारकों द्वारा पोषण माह के दौरान निम्नलिखित गतिविधियां की चलाई जाएंगी :

किशोरियों के पोषण पर विशेष ध्यान देने के साथ आदिवासी खाद्य की पोषण समृद्धि पर जागरूकता बढ़ाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए ट्राइफेड द्वारा एमएफपी (लघु वनोपज) संग्रहकर्ताओं की बैठक के साथ-साथ वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से ट्राइफेड द्वारा आदिवासियों के लिए पौष्टिक भोजन पर जागरूकता अभियान।
ईएमआरएस स्कूलों में किचन गार्डन और न्यूट्री गार्डन को बढ़ावा देना।
राज्यों को (1) फोलिक एसिड और आयरन की अनिवार्य खुराक के संबंध में सलाह। (2) छात्रावासों में दैनिक भोजन कार्यक्रम में उच्च पौष्टिक भोजन को शामिल करना जैसे माइनर बाजरा, रागी, ड्रम स्टिक इत्यादि। (3) स्वच्छ स्वस्‍थ सर्वत्र के अलावा स्कूलों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता की समीक्षा (4) आश्रम स्कूल में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित करना।

इसी तरह जमीनी स्तर तक पहुंचने के लिए राज्य स्तर पर लोगों की भागीदारी से गतिविधियां चलाई जाएंगी।

अधिक जनजातीय जनसंख्‍या वाले ग्राम पंचायतों में पोषण अभियान के संबंध में पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता।
आदिवासी खाद्य और बाजरा पर ध्यान देने के साथ क्षेत्रीय ट्राइफेड इकाइयों के माध्यम से पोषण मेला।
ईएमआरएस (एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय) और आश्रम स्कूल के छात्रों, आदिवासी कल्याण विभाग के राज्य और जिला अधिकारियों और क्षेत्र स्तर के अधिकारियों द्वारा पोषण रैली।
ट्राइफेड राज्य इकाइयों द्वारा एमएफपी (लघु वनोपज) संग्रहकर्ताओं की बैठक आयोजित की जाएगी।
पोषण माह के प्रभाव की समीक्षा करने के लिए पंचायत की बैठकें और अंत में सभी संबंधित राज्य सरकार के कार्यालयों, ईएमआरएस और आश्रम स्कूलों, ग्राम सभा, पंचायत द्वारा आयोजित गतिविधियों पर राज्य आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा एक समेकित रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
पारंपरिक जनजातीय खाद्य पदार्थों के आहार मूल्य पर अनुसंधान और दस्तावेजीकरण करने और उसे बढ़ावा देने में जनजातीय अनुसंधान संस्‍थान (टीआरआई) को शामिल करना।
ग्राम सभा स्तर पर प्रभात फेरी। ट्राइफेड राज्य इकाइयों द्वारा जनजातीय हाट बाजार गतिविधियां। ट्राइफेड की राज्य इकाइयां पोषण के समाधान के लिए बैठकें करेंगी। सभी ईएमआरएस और आश्रम स्कूलों में किशोरियों के लिए जागरूकता अभियान। जनजातीय अनुसंधान संस्‍थान छात्रों पर विशेष ध्यान केन्द्रित करते हुए आदिवासी जनसंख्‍या के बीच पोषण और स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता अभियान चलाएगा।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से बच्चों के पोषण पर ध्यान केन्द्रित करके, आदिवासी जनसंख्‍या के बीच एकलव्य स्कूलों को पोषण सीखने का केन्‍द्र बनाने और आदिवासी संचालित गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से महिलाओं को शिक्षित करने के लिए पोषण अभियान से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

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