केंद्र सरकार ‘संपूर्ण शासन’ और ‘संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण के साथ वैश्विक महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई का नेतृत्व कर रही है। कोविड प्रबंधन के लिए हितधारकों को मजबूत करने के सतत प्रयास के रूप में, सरकार लगातार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों तथा विभिन्न नोडल एजेंसियों को केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं पर सलाह दे रही है, जिन्हें उभरती हुई परिस्थितियों के आधार पर संशोधित किया जाता है। इसी तरह के जोखिम-आधारित दृष्टिकोण पर कोविड-19 (बी.1.1529) वायरस के नए ओमिक्रॉन संस्करण के उद्भव के साथ ही विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन- डब्ल्यूएचओ द्वारा “चिंता का विषय” के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर बदलती हुई स्थिति और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के संदर्भ में भारत की तैयारियों की समीक्षा के लिए कल एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने 25 और 27 नवंबर 2021 के अपने पत्रों के माध्यम से राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को जांच, चौकसी, हॉटस्पॉट की निगरानी, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में वृद्धि, जीनोम अनुक्रमण एवं जन जागरूकता बढ़ाने के बारे में सलाह दी है, जिनमें से पहले को डब्ल्यूएचओ के द्वारा ओमिक्रॉन संस्करण को चिंता के एक विषय (वीओसी) के रूप में चिह्नित करने के तुरंत बाद जारी किया गया था।
अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों और उनके संपर्कों की स्क्रीनिंग और जांच, नियमित चौकसी तथा निगरानी में वृद्धि, और नामित इंसाकॉग जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं (आईजीएसएल) को आरटी-पीसीआर सकारात्मक नमूनों को समय पर भेजने की तीन-स्तरीय निगरानी रणनीति के ईमानदारी से कार्यान्वयन एवं कठोर निगरानी के महत्व तथा कोविड-19 हॉटस्पॉट के निरीक्षण और उन पर नजर रखने के लिए जोर दिया गया।
यह बहुत ही अनिवार्य है कि जोखिम भरे देशों से यात्रा करने वाले और पारगमन करने वाले सभी अंतर्राष्ट्रीय यात्री जो भारत आने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की “जोखिम वाले” देश श्रेणी का हिस्सा हैं तथा अन्य सभी ‘जोखिम के देशों में भी शामिल हैं, और जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय आगमन के लिए संशोधित दिशानिर्देशों में दर्शाया गया है, वे सभी दिनांक 11 नवंबर 2021 को जारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार कठोर जांच और परीक्षण के अधीन हैं। मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के संपर्कों को भी बारीकी से ट्रैक करना और उनकी जांच किया जाना शामिल है।
इस संबंध में आज गृह सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक हुई, जिसमें ओमिक्रॉन वायरस के मद्देनजर समग्र वैश्विक स्थिति की व्यापक समीक्षा की गई। इस बैठक में नीति आयोग में सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. विजय राघवन और स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन तथा अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न डोमेन विशेषज्ञों की उपस्थिति हुई।
विभिन्न निवारक उपायों को जिन्हें और बेहतर किया जाना है, उन पर चर्चा की गई। आने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की जांच और निगरानी पर मानक संचालन प्रक्रिया की समीक्षा तथा अद्यतन, विशेष रूप से उन देशों के लिए जिनकी ‘जोखिम वाले’ देशों की श्रेणी में पहचान की गई थी, उन पर भी चर्चा की गई। इंसाकॉग नेटवर्क के माध्यम से वेरिएंट के लिए जीनोमिक निगरानी के सुदृढ़ीकरण और गहनता पर विशेष रूप से उन देशों के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के नमूने तथा संपूर्ण जीनोम अनुक्रमण पर ध्यान केंद्रित करने पर सहमति व्यक्त की गई जहां वायरस के ओमिक्रॉन संस्करण का पता चला है।
हवाईअड्डा स्वास्थ्य अधिकारियों (एपीएचओ) और बंदरगाह स्वास्थ्य अधिकारियों (पीएचओ) को हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों पर जांच प्रोटोकॉल के सख्त पर्यवेक्षण के लिए संवेदनशील बनाया गया है।
बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य के अनुसार, निर्धारित वाणिज्यिक अंतर्राष्ट्रीय यात्री विमान सेवा को फिर से शुरू करने की प्रभावी तिथि पर निर्णय की समीक्षा की जाएगी। देश के भीतर उभरती महामारी की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
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