केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने आज चौथे राष्ट्रीय युवा पुलिस अधीक्षक सम्मेलन और पुलिस एक्सपो के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर BPR&D (पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो) के महानिदेशक और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के महानिदेशक/महानिरीक्षक/उप महानिरीक्षक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) और केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPOs) के महानिरीक्षक/उप महानिरीक्षक, युवा पुलिस अधीक्षक, कमांडेंट और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के सम्मेलन के लिए बीपीआरएंडडी द्वारा चुना गया विषय ‘साइबर अपराध- प्रबंधन, ड्रोन एवं काउंटर ड्रोन में नवाचार और अनुसंधान’ आज के समय में बहुत ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि बीपीआरएंडडी अपनी स्थापना के समय से उत्तम कार्यप्रणालियों और मानकों के प्रोत्साहन द्वारा हर उस क्षेत्र के विकास में शामिल रहा है, जहां देश की पुलिस की क्षमता निर्माण, प्रशासनिक एवं सुधारात्मक सुधार, आधुनिकीकरण और उन्नयन की आवश्यकता है। बीपीआरएंडडी ने राष्ट्र की सेवा में 52 साल की लंबी यात्रा पूरी की है और ब्यूरो देशभर में शांति, सद्भाव सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने तथा भारतीय पुलिस के हर कदम का मार्गदर्शन एवं संवर्धन करने के लिए अनुकरणीय कार्य कर रहा है।
नित्यानंद राय ने कहा कि लोक प्रशासन में पुलिस सबसे अहम हिस्सा है, जो सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है। पुलिस राष्ट्र की शांति और सद्भाव की प्रहरी है, जिसकी किसी भी राष्ट्र और उसके नागरिकों को सबसे अधिक आवश्यकता होती है और देश में एक सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता होती है, जो पुलिस ही प्रदान करती है और इस तरह पुलिस देश के विकास यात्रा का एक अनिवार्य अंग है। उन्होंने कहा कि हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियां दो मोर्चों पर परिवर्तन देख रही हैं, पहला, दिन-प्रतिदिन नई आपराधिक चुनौतियों को हल करने के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाना, अपराध पैटर्न की बेहतर पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि का उपयोग करना, और दूसरा, तेजी से बदलते अपराध पैटर्न और उनके तौर-तरीके को समझना और कड़ी कार्यवाही करना। नित्यानंद राय ने कहा कि अपराधी इस तकनीकी क्रांति का अधिक तेजी से दुरूपयोग करके हमारे सामने गंभीर खतरों और चुनौतियों को खड़ा कर रहे हैं, जिन पर हमें तत्काल ध्यान देने और नागरिकों और बुनियादी ढांचों की रक्षा के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हमेशा विरोधियों से आगे रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि साइबर हमले, रैंसम-वेयर हमले, पहचान उजागर होना और बुनियादी ढांचों का प्रभावित होना आदि साइबर सुरक्षा डोमेन में होने वाले अपराध पैटर्न की कुछ प्रमुख श्रेणियां हैं।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध और साइबर हमले आम लोगों के जीवन पर व्यापक प्रभाव छोड़ते हैं। इसके अलावा समुदायों के बीच अशांति और अविश्वास पैदा करने, नफरत फैलाने, साइबर फ्रॉड करने, नकली और मनगढ़ंत खबरें फैलाने के लिए भी सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में गृह मंत्रालय साइबर अपराधों से निपटने और साइबर हमलों को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और इसके लिए हम अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता निर्माण, साइबर अपराधों और भविष्य के अपराधों से निपटने के लिए रणनीतिक संस्थानों की स्थापना और दोषियों के समयबद्ध अभियोजन के लिए अपनी कानूनी प्रणाली को उन्नत करने में लगातार प्रयासरत हैं। नित्यानंद राय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने समन्वित और प्रभावी तरीके से साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना की है। इस समन्वय केंद्र के सात घटक हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण घटक राष्ट्रीय साइबर अपराध अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र BPR&D में स्थित है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में पैसा गंवाने वाले आम नागरिकों को त्वरित और समय पर सहायता प्रदान करने के लिए, सरकार ने एक डेडिकेटेड टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर-1930 की शुरुआत की है और इसके लिए एक पोर्टल भी है जहाँ लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
नित्यानंद राय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दिशा-निर्देशन में गृह मंत्रालय साइबर अपराध की चनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध और तैयार हैl देश के सभी 16,347 पुलिस थानों में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) लागू किया गया है और 99 प्रतिशत थानों में 100 प्रतिशत एफआईआर सीधे सीसीटीएनएस में दर्ज की जा रही है। इसके अलावा साइबर क्राइम से निपटने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने का काम पुलिस चौकी स्तर तक पूरा हो चुका है, जबकि साइबर क्राइम के खिलाफ एनालिटिकल टूल बनाने का काम भी 40 फीसदी तक पूरा हो चुका है।
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि अगर हम अपनी आंतरिक सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा को मजबूत करने की बात करते हैं तो ड्रोन लड़ाकू अभियानों, निगरानी, दूरदराज के इलाकों में संचार आदि में उपयोगी हो सकते हैं। इसके अलावा इनका उपयोग प्राकृतिक आपदाओं और आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं, भोजन और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन और खोज एवं बचाव अभियानों के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत ड्रोन महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर ड्रोन के इस्तेमाल को क्रांतिकारी बताते हुए इसे आधुनिक कृषि प्रणाली के दिशा में एक नया अध्याय बताया हैl उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के अंतर्गत देश के गाँवों में भू-संपत्ति की डिजिटल मैपिंग की जा रही है और आने वाले समय में ड्रोन सेवाओं से गाँव में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बना कर रोजगार के नए रास्ते खोले जा सकते हैंl इसके अलावा ड्रोन की मदद से आने वाले समय में मछुआरों और किसानों की उपज को कम से कम नुकसान के साथ न्यूनतम समय में बाजार में पहुचाये जाने के साथ फसलों पर कीटनाशकों का छिडकाव करना भी आसान हो जायेगाl उन्होंने कहा कि बीपीआरएंडडी ने अनुसंधान-आधारित समाधान विकसित करने में अकादमिक, उद्योग और LEAs के बीच तालमेल स्थापित करना शुरू कर दिया है, जो एक हर्ष का विषय है।
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