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गिलोय उपयोग के लिए सुरक्षित है: आयुष मंत्रालय

आयुष मंत्रालय ने हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों एवं पोस्ट में गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) के उपयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ध्यान दिया है।

यह परामर्श यह पुष्टि करने के लिए जारी किया जा रहा है कि गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) उपयोग करने के लिहाज से सुरक्षित है लेकिन कुछ समान दिखने वाले पौधे जैसे टिनोस्पोरा क्रिस्पा हानिकारक हो सकते हैं। गुडुची एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है, जिसे गिलोय के नाम से जाना जाता है और आयुष प्रणालियों में लंबे समय से चिकित्सा के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है।

गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) की सुरक्षा और प्रभावकारिता को प्रमाणित करने के लिए पीयर रिव्यू वाली अनुक्रमित पत्रिकाओं में अच्छी संख्या में अध्ययन प्रकाशित हुए हैं। इसके हेपाटो-सुरक्षात्मक गुण भी अच्छी तरह से स्थापित हैं। गुडुची अपने विशाल चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए जाना जाता है और इसके इस्तेमाल को विभिन्न लागू प्रावधानों के अनुसार विनियमित किया जाता है।

यह देखा गया है कि टिनोस्पोरा की विभिन्न प्रजातियां उपलब्ध हैं और केवल टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया का उपयोग चिकित्सा विज्ञान में किया जाना चाहिए, जबकि समान दिखने वाली प्रजातियां जैसे टिनोस्पोरा क्रिस्पा से प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

नीचे इन पौधों की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई है

पौधे का हिस्सा
टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया
टिनोस्पोरा क्रिस्पास

तना
* रंग में हरा* छोटा घुमावदार निकला हुआ हिस्सा नहीं होता* दूध जैसा स्राव नहीं होता
     * रंग में धूसरछोटा घुमावदार निकला हुआ हिस्सा होता हैदूध जैसा स्राव होता है

पत्ते
* दिल के आकार के होते हैं जो नीचे की तरफ घूमे हुए होते हैं
दिल के आकार के होते हैं और नीचे की तरफ घूमे हुएनहीं होते हैं

पंखुड़ियां
संख्या छह
संख्या तीन

गुठलीदार फल (फलों का गुच्छा)
गोलाकार या गेंद के आकार कारंग में लाल
दीर्घवृत्ताभ या रग्बी गेंद के आकार की तरहनारंगी रंग

पौधे की तस्वीर

इस प्रकार, यह दोहराया जाता है कि गुडुची एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है, हालांकि एक योग्य, पंजीकृत आयुष चिकित्सक के परामर्श से इसका उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

आयुष मंत्रालय के पास फार्माकोविजिलेंस (आयुष दवाओं से संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की जानकारी देने के लिए) की एक अच्छी तरह से स्थापित प्रणाली है, जिसका नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है। यदि आयुष दवाओं के सेवन के बाद कोई संदिग्ध प्रतिकूल घटना होती है तो इसकी सूचना आयुष चिकित्सक के माध्यम से नजदीकी फार्माकोविजिलेंस सेंटर को दी जा सकती है। इसके अलावा यह सलाह दी जाती है कि आयुष दवा और उपचार केवल एक पंजीकृत आयुष चिकित्सक की देखरेख में एवं परामर्श से ही लें।

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