केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध मधुमेह विशेषज्ञ भी हैं, ने आज कहा कि गर्भावस्था में मधुमेह की रोकथाम भारत की भावी पीढ़ी के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिप्सी (डायबिटीज इन प्रेग्नेंसी स्टडी ग्रुप ऑफ इंडिया) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि टाइप-2 डायबिटीज मेलिटस भारत में पहले ही महामारी का रूप धारण कर चुका है और भारत को इसके चलते दुनिया की मधुमेह राजधानी होने का यह अनचाहा गौरव हासिल प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा, इस तरह की खतरनाक स्थिति में जब तक हम गर्भवती महिलाओं में मधुमेह को प्रभावी ढंग से रोकने में सक्षम नहीं होते हैं, तब तक टाइप -2 मधुमेह मेलिटस की श्रृंखला को एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी तक जाने में रोकना संभव नहीं हो सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, यह एक सर्वविदित तथ्य है कि एक महिला जिसे गेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस (जीडीएम) हो जाता है, वह अपनी संतान को टाइप-2 मधुमेह विकसित करने के लिए एक उच्च प्राथमिकता देने की संभावना रखती है और वह भी अपेक्षाकृत कम उम्र में।
डॉ. जितेंद्र सिंह, जो डिप्सी के संस्थापक सदस्य हैं और उस टीम के सदस्य भी हैं, जिसने गर्भावस्था में मधुमेह के उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त दिशा-निर्देश निर्धारित किए थे, ने डॉ. वी. सेशियाह की विशेष रूप से प्रशंसा की, जिन्होंने अपना जीवन समय मधुमेह रोग के उपचार के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा, लगभग आधी शताब्दी पहले, डॉ. वी. सेशियाह और उनकी टीम ने प्रत्येक गर्भवती महिला में ब्लड शुगर के लिए “स्पॉट टेस्ट” करने की सिफारिश की थी और आज उसी टीम द्वारा “गर्भावस्था में एकल प्रक्रिया परीक्षण” विकसित किया गया है। इसे भविष्य के प्रबंधन के लिए विश्वसनीय और प्रभावी के रूप में दुनिया भर में स्वीकार किया गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. वी. सेशियाह अब गर्भवती महिलाओं में मधुमेह की प्राथमिक रोकथाम की ओर बढ़ गए हैं और कहा कि इसकी सफलता न केवल भारत में मधुमेह की महामारी को नियंत्रित करने में मदद करेगी बल्कि युवाओं के अच्छे स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित करेगी। युवा जिनकी ऊर्जा और उत्पादकता अगले 25 वर्षों के लिए महत्वपूर्ण है, जिसे प्रधानमत्री नरेन्द्र मोदी अमृत काल के रूप में वर्णित करते हैं, जब भारत विश्व के शिखर पर पहुंच जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज के नवजात शिशु कल के युवा हैं और वे वर्ष 2047 में भारत के चेहरे और प्रोफाइल को निर्धारित करेंगे और इसलिए हम सभी को न केवल चिकित्सा बिरादरी को बल्कि पूरे देश को गर्भावस्था में मधुमेह की प्राथमिक रोकथाम के लिए डॉ. वी. सेशियाह द्वारा उठाए गए कदमों को समर्थन और सहयोग देना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में “डिजिटल स्वास्थ्य मिशन” का उल्लेख करने के साथ, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, सरकार आज निवारक स्वास्थ्य देखभाल को उच्च प्राथमिकता दे रही है, जो भारत द्वारा कोविड के खिलाफ पहला डीएनए टीका विकसित करने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत देखरेख और संरक्षण में इसे बाकी दुनिया को प्रदान करने के तरीके से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि डॉ. वी. सेशियाह द्वारा गर्भावस्था में मधुमेह की रोकथाम की परियोजना सरकार की निवारक स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
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