भारत के खाद्य सुरक्षा के प्रति दृष्टिकोण और नवाचारों से भारत सरकार की समाज के गरीब और कमजोर तबकों के प्रति चिंता एवं संवेदनशीलता की झलक मिलती है। इसकी विश्व व्यापार संगठन के सम्मेलन में दुनिया भर से आए प्रतिभागियों ने सराहना की है।
26 अप्रैल, 2022 को जेनेवा में खाद्य सुरक्षा पर हुए विश्व व्यापार संगठन के उच्च स्तरीय सम्मेलन में जेनेवा के व्यापार अधिकारियों, नीति निर्माताओं, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और थिंक टैंकों के विशेषज्ञों आदि के बीच व्यापार एवं खाद्य सुरक्षा पर संवाद हुआ।
विश्व व्यापार संगठन के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग में संयुक्त सचिव एस. जगन्नाथन ने विशेष रूप से कोविड के दौरान देश के सबसे ज्यादा कमजोर वर्ग के लोगों की पर्याप्त खाद्यान्न तक सफलतापूर्वक गरिमापूर्ण और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने के भारत के शानदार अनुभव के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी आधारित साहसी सुधारों और ऐतिहासिक नवाचारों की एक श्रृंखला के माध्यम से संपन्न हुआ। उन्होंने डब्ल्यूटीओ के उच्च स्तरीय सम्मेलन के दौरान ‘राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अनुभव’ पर बने पैनल में भारत के संदर्भ में विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
उन्होंने देश भर में नागरिक केंद्रित सरकारी कार्यक्रमों की पहुंच को बढ़ाने के लिए विभागों के बीच डाटा साझा करने से संबंधित सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
हाल के दौर में, कोविड-19 संकट के दौरान जिस तरह से भारत की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी योजना को बेजोड़ गति, व्यापक रूप में, पारदर्शिता और सही लक्ष्य के साथ काम करने के एक बेहतरीन उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, एस जगन्नाथन ने भारत सरकार द्वारा हर समय सामान्य और मुफ्त दोनों खाद्यान्न की उपलब्धता, सामर्थ्य और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गईं इन सफल रणनीतियों के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कोविड के दौरान देश में लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएम-जीकेएवाई) द्वारा निभाई गई भूमिका को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने बताया कि कैसे सुधार की अवधि के दौरान आपूर्ति के झटकों और महंगाई में बढ़ोतरी के खिलाफ इस योजना से सहायता मिली। इसके लिए 22 अरब डॉलर की नियमित खाद्य सब्सिडी के अलावा लगभग 45 अरब डॉलर की अतिरिक्त खाद्य सब्सिडी दी गई।
उन्होंने बताया कि पीडीएस, आईसीडीएस और पीएम पोषण एवं पीएमजीकेएवाई में भारत के खाद्य सुरक्षा उपायों से महिला एवं बाल पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में यूएन से सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने में अंशदान किया गया है। ये मानव विकास के बुनियादी संकेतक हैं।
उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित ऐतिहासिक पहल ‘वन नेशन वन राशन’ का उल्लेख किया, जिससे एनएफएसए लाभार्थियों विशेषकर प्रवासी लाभार्थियों के लिए अपने मौजूदा राशन कार्ड से बायोमीट्रिक/ आधार प्रमाणन से देश में 5 लाख फेयर प्राइस शॉप्स (एफपीएस) से अपना पूरा या आंशिक खाद्यान्न लेना संभव होता है। परिजनों के घर वापस लौटने की स्थिति में इस व्यवस्था से उसी राशन कार्ड पर बाकी खाद्यान्न लेना संभव होता है। कोविड के दौरान ओएनओआरसी के तेज कार्यान्वयन से लाभार्थी 58 करोड़ पोर्टेबिल लेनदेन और शुरुआत से अभी तक 65 करोड़ पोर्टेबिल लेनदेन के माध्यम से 5 अरब डॉलर की खाद्य सब्सिडी का लाभ लेने में सक्षम हुए हैं।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों और क्षेत्रों से मिले व्यापार और खाद्य सुरक्षा के कई आयामों के बीच के संबंधों पर केंद्रित राष्ट्री अनुभव साझा किए गए और उन पर चर्चा हुई, जिसमें मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों के संदर्भ में पहुंच, उपलब्धता, स्थायित्व और उपयोग जैसे मुद्दे भी शामिल थे।
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