इन्सेफेलाइटिस को लोग बोलचाल की भाषा में जापानी बुखार भी कहते हैं, उत्तर प्रदेश में हर साल कई नवजात शिशुओं की इस बिमारी से मौत हो जाती है, कुछ उपायो से इस बिमारी से बचा जा सकता है ।
इन्सेफेलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण ज्यादा गंदगी वाली जगह पर पनपता है साथ हा मच्छर के काटने से भी होता है। हर साल उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में इस बिमारी के कारण नवजात शिशुओं के साथ बच्चों की मृत्यु हो जाती है । हाल ही में उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में इस बिमारी के कारण 45 दिनों में 71 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है ।
जपानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण
जापानी इन्सेफेलाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है. यह बिमारी अगस्त , सितंबर और अक्टूबर माह में ज्यादा फैलता है और 1 से 14 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है.
जापानी इन्सेफेलाइटिस से बचाव के उपाय
नवजात बच्चे का समय से टीकाकरण कराएं , साफ सफाई का ख़ास ख्याल रखे , गंदे पानी को जमा ना होने दे साथ ही साफ और उबाल कर पानी पियें, बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खाना दे. हल्का बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाए.
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