प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (एनसीएसके) के कार्यकाल को 31.03.2025 से आगे तीन वर्षों के लिए (अर्थात 31.03.2028 तक) बढ़ाने को स्वीकृति दे दी है।
एनसीएसके के तीन वर्षों के विस्तार के लिए कुल वित्तीय प्रभाव लगभग 50.91 करोड़ रुपये का होगा।
इससे सफाई कर्मचारियों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान को सुविधाजनक बनाने, सफाई क्षेत्र में काम करने की स्थिति में सुधार लाने और खतरनाक सफाई कार्य करते समय शून्य मृत्यु दर की स्थिति में पहुंचने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
आयोग के कार्य
एनसीएसके से जुड़े कार्य इस प्रकार हैं:
क) सफाई कर्मचारियों की स्थिति, सुविधाओं और अवसरों में असमानताओं को समाप्त करने की दिशा में केंद्र सरकार के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों की सिफारिश करना;
(ख) सफाई कर्मचारियों और विशेष रूप से मैला ढोने वालों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास से संबंधित कार्यक्रमों और योजनाओं के कार्यान्वयन का अध्ययन और मूल्यांकन करना;
(ग) विशिष्ट शिकायतों की जांच करना और (i) सफाई कर्मचारियों के किसी समूह के संबंध में कार्यक्रमों या योजनाओं, (ii) सफाई कर्मचारियों की मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से लिए गए निर्णयों, दिशा-निर्देशों आदि के गैर-कार्यान्वयन से संबंधित मामलों का स्वतः संज्ञान लेना; (iii) सफाई कर्मचारियों आदि के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए उपाय,
(घ) सफाई कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और वेतन से संबंधित कार्य स्थितियों का अध्ययन और निगरानी करना,
(ङ) सफाई कर्मचारियों से संबंधित किसी भी मामले पर केंद्र या राज्य सरकार को रिपोर्ट देना, जिसमें सफाई कर्मचारियों के सामने आ रही किसी भी मुश्किल या अक्षमता को ध्यान में रखा जाएगा; और
(च) कोई अन्य मामला जो केंद्र सरकार द्वारा उसे भेजा जा सकता है।
मैला उठाने वालों (मैनुअल स्कैवेंजर्स) के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 (एमएस अधिनियम 2013) के प्रावधानों के तहत, एनसीएसके निम्नलिखित कार्य करेगा:
i. अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी करना;
ii. इस अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में शिकायतों की जांच करना तथा आगे कदम उठाए जाने के लिए आवश्यक सिफारिशों के साथ अपने निष्कर्षों को संबंधित अधिकारियों को सूचित करना;
iii. इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्र और राज्य सरकार को सलाह देना; और
iv. इस अधिनियम के गैर-कार्यान्वयन से संबंधित मामले का स्वतः संज्ञान लेना।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम, 1993 को सितंबर, 1993 में अधिनियमित किया गया था और एक वैधानिक राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का गठन पहली बार अगस्त, 1994 में किया गया था।
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