केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया है कि जनगणना अधिनियम 1948 के अनुसार केवल केंद्र को ही जनगणना कराने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय में दिए गए शपथ पत्र में केंद्र ने कहा है कि वह संविधान के प्रावधानों और कानूनों के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गों और सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र ने कहा है कि उसको छोड़कर और किसी भी संस्था को जनगणना या इस तरह की कार्रवाई का अधिकार नहीं है।
केंद्र ने यह शपथ पत्र सर्वोच्च न्यायालय में उन याचिकाओं की सुनवाई के सिलसिले में दिया है जिनमें बिहार सरकार की ओर से जातिगत सर्वेक्षण कराने के आदेश को बहाल करने के पटना उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती दी गई है। एक याचिकाकर्ता के अनुसार पटना उच्च न्यायालय ने इस तथ्य पर विचार किए बिना ही याचिका खारिज कर दी कि बिहार सरकार के पास जातिगत सर्वेक्षण की अधिसूचना जारी करने की योग्यता नहीं है।
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