केन्द्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडे ने नोएडा में बिजली और भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुजर, लोकसभा सदस्य एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर, नोएडा के विधायक पंकज सिंह और भारी उद्योग मंत्रालय में सचिव अरुण गोयल की उपस्थिति में बी एच ई एल द्वारा विकसित अत्याधुनिक वायु प्रदूषण नियंत्रण टॉवर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बी एच ई एल के अध्यक्ष डॉ. नलिन सिंघल, बी एच ई एल के निदेशक मण्डल तथा भारी उद्योग मंत्रालय, नोएडा प्राधिकरण और बी एच ई एल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
एपीसीटी का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जो नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को स्रोत पर ही खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही हमें वायु प्रदूषण को कम करने के विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।
वायु प्रदूषण को खत्म करने के लिए बी एच ई एल और नोएडा प्रशासन द्वारा की गई पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. पांडे ने कहा कि उद्योग और प्रशासन के बीच इस तरह के सक्रिय सहयोग से वायु प्रदूषण से निपटा जा सकता है और इस तरह का सहयोग समय की जरूरत है। उन्होंने एपीसीटी को डिजाइन करने वाले बीएचईएल के कॉरपोरेट आरएंडडी इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने इसे निर्मित करने वाले हैवी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट प्लांट, हरिद्वार के इंजीनियरों और इसे स्थापित करने वाले उत्तरी-ज़ोन के ऊर्जा क्षेत्र के इंजीनियरों का भी आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. पांडे ने यह भी उल्लेख किया कि यह एपीसीटी पूरी तरह से स्वदेशी है जो माननीय प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सफलता में योगदान देगा। एपीसीटी की कम लागत के बारे में बात करते हुए मंत्री ने इंजीनियरों से इस उत्पाद को और बेहतर बनाने तथा इसकी लागत को और कम करने का आह्वान किया ताकि प्रदूषण की समस्या होने पर ऐसे टावर और अधिक संख्या में लगाए जा सकें।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सर्दी के महीनों में विशेष रूप से वायु प्रदूषण की समस्या से ग्रस्त होता है और वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है, जो स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।
बीएचईएल के कॉरपोरेट आरएंडडी डिवीजन द्वारा डिजाइन और विकसित, इसके एचईईपी हरिद्वार संयंत्र में निर्मित, और पावर सेक्टर [एनआर] नोएडा द्वारा स्थापित, एपीसीटी अपने बेस के माध्यम से प्रदूषित हवा को खींचकर टावर में लगे फिल्टर में पार्टिकुलेट मैटर यानि प्रदूषण कणों को हवा से अलग कर देता है। इसके बाद टावर के ऊपरी हिस्से से स्वच्छ हवा निकलती है। पार्टिकुलेट मैटर यानि प्रदूषण कण एपीसीटी के निचले हिस्से में लगे हॉपर में इकठ्ठा होते हैं, जिन्हें समय-समय पर निपटान के लिए टॉवर से अलग किया जाता है। हरिद्वार स्थित भेल का प्रदूषण नियंत्रण अनुसंधान संस्थान एपीसीटी के प्रदर्शन पर एक वर्ष तक अध्ययन करेगा।
प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले इस टॉवर को नोएडा में डीएनडी फ्लाईवे को नोएडा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले स्लिप रोड के बीच रिक्त स्थान पर स्थापित किया गया है। उल्लेखनीय है कि डीएनडी और नोएडा एक्सप्रेसवे पर वाहनों का आवागमन अधिक होने के कारण क्षेत्र में प्रदूषण अधिक है।
नोएडा प्राधिकरण ने टावर के लिए जगह मुहैया कराई है और प्राधिकरण इसके संचालन में आने वाले खर्च का 50 फीसदी वहन करेगा। इसके डिजाइन से लेकर निर्माण, स्थापित करने और इसे कार्यशील करने से संबंधित अन्य सभी प्रकार की पूंजीगत लागत का खर्च बीएचईएल द्वारा वहन किया गया है।
इस प्रायोगिक परियोजना की सफलता के आधार पर ऐसे और भी प्रदूषण नियंत्रण टॉवर एन सी आर के अन्य हिस्सों में भी स्थापित किए जाएंगे ताकि क्षेत्र की वायु गुणवत्ता को बेहतर किया जा सके।
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