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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दमन में गृह मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज दमन में गृह मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा और निशिथ प्रमाणिक, समिति के 11 सदस्य, केन्द्रीय गृह सचिव, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रशासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के मुख्य सचिव और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स के महानिदेशकों ने बैठक में भाग लिया। समिति ने जम्मू-कश्मीर के विकास और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार जम्मू-कश्मीर के सर्वांगीण विकास के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है और सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

चर्चा के दौरान इस बात पर प्रकाश डाला गया कि 6 अगस्त, 2019, जम्मू-कश्मीर के लिए एक ऐतिहासिक दिन था जब भारतीय संसद ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का निर्णय लिया। इसके साथ, हमारे देश के नागरिकों को प्राप्त सभी संवैधानिक प्रावधानों को जम्मू और कश्मीर के लिए भी उपलब्ध कराया गया, जिनमें शिक्षा का अधिकार, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम जैसे प्रगतिशील कानून शामिल थे। ये कानून केंद्रशासित प्रदेश में पूरी तरह से लागू किए गए हैं। इन कानूनों के लागू होने से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों सहित सभी को समानता और निष्पक्षता की गारंटी मिली है। नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही बिजली उत्पादन, इसके वितरण, सिंचाई योजनाओं, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क-रेल-हवाई परिवहन, पर्यटन, रोजगार आदि क्षेत्रों में भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। इसके अलावा, जम्मू और कश्मीर में शासन के विकेंद्रीकरण के लिए धन, कार्य और पदाधिकारी प्रदान कर पंचायती राज संस्थानों को मजबूत किया गया। इन पहलों से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए हैं।

अनुच्छेद 370 को निरस्त करना केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में एक परिवर्तनकारी कदम साबित हुआ है, जिससे विकास, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक आयामों में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। पथराव और संगठित हड़तालें अतीत की बात हो गई हैं। गृह मंत्रालय त्वरित और समावेशी विकास के पथ पर आगे बढ़ने और जम्मू-कश्मीर के लोगों को उनके भविष्य को आकार देने और नई आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों पर चर्चा के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार भारत की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह कटिबद्ध है। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा से संबंधित मुद्दों से निपटने और कानून और व्यवस्था बनाए रखने में केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों द्वारा किए गए शानदार काम की सराहना की। अमित शाह ने इस बात को भी दोहराया कि सीएपीएफ-कर्मियों और उनके परिजनों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गृह मंत्री ने सभी अधिकारियों से प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विज़न को हासिल करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को जारी रखने का आह्वान किया।

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत गृह मंत्रालय ने तय किया है कि 2024 से सीएपीएफ के लिए कांस्टेबल (सामान्य ड्यूटी) परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित की जाएगी। बैठक के दौरान बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में 2.43 लाख से अधिक कर्मियों की भर्ती की गयी है और रोजगार मेले के तहत पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 98676 उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई है और लगभग 54000 कर्मियों को पदोन्नत किया गया है। सीएपीएफ की भर्ती में एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों को बोनस अंक प्रदान किए जाते हैं और पिछले 3 वर्षों के दौरान 3560 एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों ने इसका लाभ उठाया है। समिति के सदस्यों को यह जानकारी भी दी गई कि पिछले 10 वर्षों के दौरान सीएपीएफ में 54 बटालियनें गठित की गई हैं।

बैठक के दौरान सीएपीएफ कर्मियों के कल्याण के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों पर भी चर्चा की गई, जिसमें भारत के वीर, आयुष्मान सीएपीएफ, प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि में वृद्धि शामिल है। सीएपीएफ में अग्निवीर को शामिल करने के लिए भर्ती नियमों में प्रावधान और पात्रता मानदंड में छूट पर भी चर्चा की गई। समिति को यह भी बताया गया कि सीएपीएफ द्वारा देशभर में 5.10 करोड़ पौधों का रोपण, वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और सीएपीएफ के परिसरों में शहद मिशन और सीएपीएफ में बाजरा के उपयोग आदि सहित विभिन्न पहल की गई हैं। बुनियादी ढांचे के निर्माण, आधुनिकीकरण और आवास संतुष्टि अनुपात बढ़ाने से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई। समिति को बताया गया कि सरकार सीएपीएफ कर्मियों के जीवन को आरामदायक बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।

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