केंद्रीय लघु कुटीर और मध्यम उपक्रम मंत्री नारायण राणे ने आज मुंबई में संशोधित सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी निधि ट्रस्ट योजना का शुभारंभ किया। सीजीटीएमएसई को वित्त वर्ष 2023-24 के केंद्रीय बजट में 9000 करोड़ की अतिरिक्त सुरक्षा निधि सहायता प्रदान की गयी है, ताकि सूक्ष्म और लघु उद्यमों को अतिरिक्त 2,00,000 करोड़ रुपये की गारंटी प्रदान करने के लिए इस योजना में सुधार लाया जा सके।
इसके अनुसार योजना को ठीक करने के लिए प्रमुख सुधार शुरू किए गए और ऋण देने वाली संस्थाओं को उन से अवगत कराया गया। संशोधनों में न्यूनतम गारंटी शुल्क को केवल 0.37% प्रतिवर्ष के स्तर पर लाते हुए 1 करोड़ तक के ऋण के लिए गारंटी शुल्क में 50% की कमी शामिल है। घोषणा में एक अन्य प्रमुख बदलाव लाते हुए गारंटी शुल्क की सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करना और कानूनी कार्रवाई शुरू किए बिना दावा निपटान के लिए सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया।
सुधारों की शुरुआत करते हुए नारायण राणे ने उधार देने वाली संस्थाओं पर दबाव बनाया कि वे उदारीकरण का सर्वोत्तम उपयोग करें ताकि संपार्श्विक के लिए ज़ोर दिए बिना एमएसई खंड को बढ़ा हुआ ऋण दिया जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह के उपाय बैंकरों को संपार्श्विक सुरक्षा की उपलब्धता पर निर्भरता कम करने के लिए उत्साहित करेंगे जो एमएसई विशेष रूप से पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है।
इस अवसर पर बोलते हुए सचिव बी. बी. स्वैन ने बताया कि सीजीटीएमएसई संबंधित राज्यों में सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए गारंटी कवरेज को बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों के साथ सहयोग कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सीजीटीएमएसई द्वारा की जा रही अन्य पहलुओं के साथ-साथ सभी नीतिगत स्तर पर किए बदलाव के कारण गारंटी देने का अधिक उपयोग होगा।
एस. रमना जो सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक और सीजीटीएमएसई के अध्यक्ष भी हैं ने कहा कि सीजीटीएमएसई बहुत सारे नई शुरुआत कर रहा है जिसका उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्यमों के साथ-साथ ऋणदाताओं के लिए गारंटी योजना को आकर्षक बनाकर एमएसई में ऋण के प्रवाह को बढ़ाना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सीजीटीएमएसई और अधिक योजनाएँ लाएगा और ऋणदाताओं को विश्वास दिलाते हुए उन्होंने कहा कि यह उनकी आवश्यकताओं का भी त्वरित उत्तर देगा।
ऋण गारंटी योजना का बेहतर उपयोग करने वाले बैंको को केंद्रीय मंत्री द्वारा सम्मानित किया गया। बैंकरों और एनबीएफसी के वरीष्ठ अधिकारियों ने योजना में लाए जा रहे बदलाव की सराहना की और उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि ये बदलाव देश में एमएसई को संपार्श्विक मुक्त ऋण देने की सुविधा में बढ़ोतरी करेंगे और इस प्रकार बृहद स्तर पर रोजगार सृजन का कारण बनेंगे।
समारोह में यह भी घोषणा की गई किसी जी सीजीटीएमएसई के लिए वित्तीय समावेशन केंद्र को स्थापना हेतु राष्ट्रीय सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम संस्थान एनआईएम एसएमई हैदराबाद के साथ सहयोग भी करेगा।
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