भुवनेश्वर में दूसरी जी-20 संस्कृति कार्य समूह की बैठक से अलग आयोजित कार्यक्रम में, ‘सस्टेन: द क्राफ्ट इडियम’ के विषय के साथ विशेष रूप से तैयार की गई एक सांस्कृतिक प्रदर्शनी का उद्घाटन आज केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्री जी. किशन रेड्डी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने किया।
संस्कृति और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय भी इस अवसर पर उपस्थित थे। प्रदर्शनी 16 से 22 मई, 2023 तक कला भूमि – ओडिशा शिल्प संग्रहालय में आयोजित की जा रही है।
प्रदर्शनी ‘सस्टेन: द क्राफ्ट इडियम’ संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दूसरी जी-20 संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की बैठक (14 से 17 मई, 2023) के लिए आयोजित एक सांस्कृतिक परियोजना है जो ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी का विषय संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) की दूसरी प्राथमिकता – ‘एक सतत् भविष्य के लिए जीवित विरासत का उचित उपयोग’ पर आधारित और प्रतिबिंबित करता है।
प्रदर्शनी भारत की सदियों पुरानी जीवित विरासत और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की विभिन्न अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत करती है, जिन्होंने प्राचीन काल से ही व्यक्तियों, समुदायों और समाजों को उनकी मान्यताओं, मूल्यों और परंपराओं को आकार देने में सहायता की है। प्रदर्शनी की परिकल्पना आगंतुकों, पेशेवरों और नीति निर्माताओं के बीच कई जीवित विरासत प्रथाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है जो मानव जाति और प्रकृति के बीच प्राकृतिक संसाधनों और सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व के सचेत और इष्टतम उपयोग को प्राथमिकता देते हैं।
‘सस्टेन: द क्राफ्ट इडियम’ तीन घटक अनुभवों – अक्षर, स्तंभ, और उस्ताद कारीगरों और शिक्षकों द्वारा प्रदर्शनों से बना है – जो इन विविध पहलुओं को समाहित करता है। प्रदर्शनी वस्तुओं और सजीव शिक्षण प्रदर्शनों के माध्यम से भारत की 35 से अधिक शिल्प और विभिन्न भाषाओं और लिपियों को प्रदर्शित करती है।
प्रदर्शनी का पहला भाग ‘अक्षरा – क्राफ्टिंग इंडियन स्क्रिप्ट्स’, भारत की विविध भाषाओं और शिल्प प्रथाओं पर प्रकाश डालता है, जो अद्वितीय विश्व विचारों और परंपराओं को प्रदर्शित करता है। एक नई डिजाइन शब्दावली के माध्यम से, अक्षरा भारत की लिपियों की दृश्य सुंदरता को प्रदर्शित करती है, जो अक्षरों, छंदों, वाक्यांशों, कविताओं और बोलचाल की बातों के माध्यम से व्यक्त की जाती है।
दूसरा खंड ‘स्तंभ: शिल्प, सहयोग और निरंतरता’ स्वदेशी शिल्प प्रथाओं और उनके समकालीन अभिव्यक्तियों की जानकारी प्राप्त करता है। यह खंड शहरी दर्शकों के लिए अनुकूलित, कारीगरों के सहयोग से पारंपरिक शिल्प के तत्वों के साथ डिजाइन की गई कार्यात्मक वस्तुओं को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शनी में प्रसिद्ध शिल्पकारों के साथ मास्टर कक्षाएं, प्रदर्शन और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (डीआईवाई) गतिविधियां भी होंगी।
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