Categories: News-Headlines

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप एस पुरी ने ओपेक से तेल बाजारों में व्यावहारिकता, संतुलन और किफायत सुनिश्चित करने का अनुरोध किया

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री ने ओपेक के महासचिव से भेंट की, और इस दौरान ओपेक द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में की गई कटौती एवं वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर इसके प्रतिकूल प्रभावों के बारे में विस्‍तार से चर्चा की।

‘ओपेक’ और ‘ओपेक+’ ने आपस में मिलकर वर्ष 2022 से ही बाजार में कच्‍चे तेल की उपलब्धता 4.96 एमबी/प्रतिदिन (वैश्विक तेल मांग का लगभग 5 प्रतिशत) कम कर दी है जिस वजह से ब्रेंट की कीमतें जून के लगभग 72 डॉलर/बीबीएल से बढ़कर सितंबर 2023 में लगभग 97 डॉलर/बीबीएल हो गईं।

3 अक्टूबर 2023 को आयोजित वार्षिक अबू धाबी अंतर्राष्ट्रीय पेट्रोलियम प्रदर्शनी और सम्मेलन (एडीआईपीईसी) 2023 के अवसर पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और आवास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ओपेक के महासचिव हैथम अल-घैस के साथ द्विपक्षीय विषयों पर चर्चा की।

चर्चा के दौरान मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘ओपेक (10)’ और ‘ओपेक+’ के सदस्‍य देशों द्वारा अगस्त 2022 से ही कुल उत्पादन में की गई कटौती के कारण प्रभावकारी रूप से कुल वैश्विक तेल उपलब्धता बाजार में लगभग 5 प्रतिशत कम हो गई है जिस वजह से कच्चे तेल की कीमत पिछले सिर्फ तीन महीनों में ही 34 प्रतिशत से भी ज्‍यादा बढ़ गई है।

ऊर्जा यानी कच्चे तेल की बढ़ती मांग के बावजूद कुल उत्‍पादन में इस हद तक कटौती की गई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें जून के लगभग 72 डॉलर/बीबीएल से काफी बढ़कर सितंबर 2023 में लगभग 97 डॉलर/बीबीएल हो गईं जिस वजह से कच्‍चे तेल का आयात करने वाले अधिकतर उपभोक्ता देशों की खरीद क्षमता काफी घट गई है।

मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्ष 2022 में गहराए भू-राजनीतिक संकट ने महंगाई के मौजूदा दबाव को काफी बढ़ा दिया है और दुनिया के बड़े हिस्से में मंदी का वास्तविक खतरा उत्‍पन्‍न कर दिया है।

मंत्री महोदय ने यह भी कहा कि जहां एक ओर भारत सरकार ने अपने सकारात्मक उपायों या कदमों के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से प्रभावकारी ढंग से बचाया है, वहीं दूसरी ओर पूरी दुनिया को यह जानने की जरूरत है कि पिछले 18 महीनों में लगभग 100 मिलियन लोग फि‍र से स्वच्छ ईंधन के बजाय कोयले और जलावन लकड़ी का इस्‍तेमाल करने पर विवश हो गए हैं।

मंत्री महोदय ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से वर्ष 2008 की आर्थिक उथल-पुथल जैसी स्थिति बनने जा रही है, जो कि मूलत: एक अनुमान होने के बजाय वास्‍तव में सच्‍ची भविष्यवाणी बन गई थी। ब्रेंट की कीमतें शुरुआत में तो जनवरी 2008 के 93.60 डॉलर/बीबीएल से काफी बढ़कर जुलाई 2008 में 134.3 डॉलर/बीबीएल हो गई थीं, जिस वजह से वैश्विक आर्थिक मंदी ने बेहद तेज रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया था, जिससे अंततः मांग काफी घट गई थी और ऐसे में कच्‍चे तेल की कीमतें बहुत कम हो गई थीं।

वैश्विक भलाई को ध्‍यान में रखकर मंत्री महोदय ने यह सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों को संतुलित करने की वकालत की कि कच्चे तेल की कीमतें उपभोक्ता देशों की भुगतान क्षमता से कहीं अधिक न हो जाएं।

मंत्री महोदय ने ओपेक से वर्तमान आर्थिक स्थिति की गंभीरता को भलीभांति समझने का अनुरोध किया और ओपेक के महासचिव से आग्रह किया कि वे अपने पद का सदुपयोग तेल बाजारों में व्यावहारिकता, संतुलन और किफायत सुनिश्चित करने के लिए करें।

Leave a Comment

Recent Posts

NLDSL और महाराष्ट्र ने राज्य की रसद व्यवस्था को मजबूत करने और विकसित भारत का समर्थन करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और महाराष्ट्र सरकार ने एकीकृत लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म का… Read More

1 hour ago

परिसीमन का विरोध करने वाले SC/ST सीट बढ़ोतरी के भी विरोधी हैं: गृह मंत्री अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि संविधान में परिसीमन के प्रावधान किए गए हैं… Read More

1 hour ago

प्रधानमंत्री ने सांसदों से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन के पक्ष में मतदान करने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने बताया कि संसद में इस समय नारी शक्ति वंदन अधिनियम में… Read More

5 hours ago

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री… Read More

7 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण… Read More

10 hours ago

This website uses cookies.