केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गंगा संरक्षण पर अधिकृत कार्य बल (ईटीएफ) की 14वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उन्होंने एकीकृत और प्रौद्योगिकी-संचालित दृष्टिकोण के माध्यम से नदी को अधिक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। पुनर्जीवित गंगा के लिए अपने दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने परियोजनाओं के समयबद्ध निष्पादन, प्रदूषण नियंत्रण के सख्त उपायों और अंतर-मंत्रालयी समन्वय को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने दीर्घकालिक स्थायित्व प्राप्त करने के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, तत्क्षण निगरानी प्रणालियों और संरक्षण की अभिनव रणनीतियों का लाभ उठाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण के प्रयास के तहत आजीविका, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का समर्थन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, उन्होंने विकास को पारिस्थितिक संरक्षण के साथ संतुलित करने के सरकार के संकल्प को भी दोहराया। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी सहित विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रमुख हितधारक एक साथ आए।
नमामि गंगे परियोजनाओं और उपलब्धियों की समीक्षा
केंद्रीय मंत्री ने नमामि गंगे मिशन के तहत 10 राज्यों में 40,121 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय वाली 492 परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और नदी के कायाकल्प और इसके पारिस्थितिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में मिशन की महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 19,478 करोड़ रुपए की लागत वाली 307 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जो जल गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने सीवेज उपचार संबंधी इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि 3,346 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता बनाई गई है और नदी में अनुपचारित अपशिष्ट जल के निर्वहन को रोकने के लिए 4,543 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क का निर्माण पूरा हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये प्रयास प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने और गंगा के इको-सिस्टम के दीर्घकालिक स्थायित्व को सुनिश्चित करने के क्रम में महत्वपूर्ण हैं।
गंगा बेसिन में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) अनुपालन
ईटीएफ ने देवप्रयाग से हरिद्वार और उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले तक अविरल जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए 2018 राजपत्र अधिसूचना द्वारा अनिवार्य पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) संबंधी मानदंडों के अनुपालन का आकलन किया। यमुना, रामगंगा, सोन, दामोदर, चंबल और टोंस नदियों के लिए ई-फ्लो आकलन पर अध्ययन पर भी चर्चा की गई। उन्होंने 2018 राजपत्र अधिसूचना द्वारा अनिवार्य पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) मानदंडों के अनुपालन की बारीकी से समीक्षा की, गंगा की पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखने के लिए सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने यमुना, रामगंगा, सोन, दामोदर, चंबल और टोंस सहित प्रमुख नदी श्रेणियों के लिए प्रमुख ई-फ्लो आकलन का भी जायजा लिया।
औद्योगिक प्रदूषण की सख्त निगरानी और प्रदूषण में कमी
केंद्रीय मंत्री ने नमामि गंगे मिशन के तहत औद्योगिक प्रदूषण को रोकने के प्रयासों की व्यापक समीक्षा की, जिसमें प्रदूषण मुक्त गंगा के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। बैठक में निरीक्षण के सातवें दौर के परिणामों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें गंगा बेसिन में 4,246 अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग (जीपीआई) शामिल थे। उन्होंने कहा कि 2,682 उद्योग प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों का अनुपालन करते पाए गए, लेकिन उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। उन्होंने फिर से पुष्टि करते हुए कहा कि गंगा की शुद्धता को बहाल करने के लिए सख्त औद्योगिक निगरानी और प्रवर्तन सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
नदी तटीय आर्द्रभूमि का मूल्यांकन और संरक्षण
बैठक का एक मुख्य आकर्षण केंद्रीय जल शक्ति मंत्री द्वारा जीआईएस लेयर और डैशबोर्ड का शुभारंभ करना था, जो डेटा-संचालित संरक्षण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होता है। यह उन्नत प्लेटफॉर्म वेटलैंड की वैज्ञानिक और तत्क्षण निगरानी के लिए एक आधार के रूप में काम करेगा। इसमें वेटलैंड स्वास्थ्य स्कोर, खतरे का आकलन और प्राथमिकता वर्गीकरण को एकीकृत किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह अत्याधुनिक उपकरण निर्णय प्रक्रिया में सुधार करेगा, संरक्षण रणनीतियों में सुधार करेगा और नदी के किनारे की वेटलैंड की दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थायित्व सुनिश्चित करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ को रोकने, जैव विविधता संरक्षण और भूजल पुनर्भरण में आर्द्रभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने जीआईएस लेयर और डैशबोर्ड का शुभारंभ किया, जिसे आर्द्रभूमि स्वास्थ्य स्कोर, खतरे के आकलन और प्राथमिकता वर्गीकरण को एकीकृत करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे तत्क्षण निगरानी और रणनीतिक क्रिया-कलाप संभव हो पाता है। उन्होंने सभी राज्यों को नदी की आर्द्रभूमि को अधिसूचित करने और वर्गीकृत करने के प्रयासों में तेजी लाने का निर्देश दिया, ताकि उनकी दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन पारिस्थितिकी प्रणालियों की सुरक्षा गंगा बेसिन के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अभिन्न अंग है।
ड्रोन और लिडार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके नाली का उन्नत मानचित्रण
केंद्रीय मंत्री ने नदी पुनरुद्धार में अत्याधुनिक तकनीक की परिवर्तनकारी भूमिका के बारे में चर्चा करते हुए गंगा की मुख्य धारा के साथ सटीक नाले मानचित्रण के लिए ड्रोन और लिडार डेटा का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया। संरक्षण के लिए डेटा-संचालित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, मंत्री ने सभी हितधारकों से डेटा संग्रह में सक्रिय रूप से योगदान करने और प्रभावी क्रियाकलाप तैयार करने के लिए नाला मानचित्रण प्रणाली का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने पर्यावरण प्रबंधन में तकनीकी नवाचार के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की, यह सुनिश्चित करते हुए कि इस तरह की प्रगति स्वच्छ और स्वस्थ गंगा के नमामि गंगे मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
गंगा-यमुना दोआब में जलभृत मानचित्रण
मंत्री ने गंगा-यमुना दोआब में जलभृत मानचित्रण प्रयासों की विस्तृत समीक्षा की, विशेष रूप से प्रयागराज-कानपुर खंड पर ध्यान केंद्रित करते हुए, नदी के प्रवाह और भूजल भंडार को बनाए रखने में इसके महत्व पर जोर दिया। जल संसाधन प्रबंधन में वैज्ञानिक प्रगति की सराहना करते हुए, उन्होंने अध्ययन की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें जलभृतों का 3डी प्रतिरोधकता मानचित्र और एक पैलियोचैनल मानचित्र का विकास शामिल है, जो जलभृतों और नदी प्रणालियों के बीच महत्वपूर्ण संबंध स्थापित करता है। सक्रिय जल संरक्षण रणनीतियों के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि नदी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए 159 पुनर्भरण स्थलों की पहचान की गई है, और उन्होंने अनुशंसित प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण (एमएआर) योजना के कार्यान्वयन पर तेजी से कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
प्रौद्योगिकी और नवाचार के साथ संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करना
मंत्री ने जीआईएस आधारित आर्द्रभूमि निगरानी, लिडार ड्रेन मैपिंग, जलभृत पुनर्भरण और सख्त प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। नमामि गंगे मिशन के तहत, गंगा को बहाल करने और संरक्षित करने के लिए अभिनव, प्रौद्योगिकी-संचालित रणनीतियां जारी हैं, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और स्वस्थ नदी सुनिश्चित हो सके।
जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की सचिव देबाश्री मुखर्जी, पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के सचिव अशोक मीना; जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार ऋचा मिश्रा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एमएमसीजी) के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल, महानिदेशक (पर्यटन) मुग्धा सिन्हा, डीडीडब्ल्यूएस के संयुक्त सचिव जितेंद्र श्रीवास्तव, सचिव (उत्तराखंड) शैलेश बगोली, यूपीजेएन के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर, शहरी विकास सचिव बिहार अभय सिंह, पश्चिम बंगाल की परियोजना निदेशक नंदिनी घोष; नमामि गंगे मिशन के कार्यकारी निदेशक और विद्युत एवं पर्यटन मंत्रालयों के प्रतिनिधि, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के राज्य स्तरीय गणमान्य व्यक्तियों ने भी भाग लिया, जिससे नदी संरक्षण प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक सहाय़क दृष्टिकोण सुनिश्चित हुआ।
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