उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की उपलब्धियों को “असाधारण” करार देते हुए जोर देकर कहा कि सफल चंद्रयान-3 मिशन ने अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में भारत की अंतरिक्ष एजेंसी का नाम उज्ज्वल किया है।
आज राज्यसभा में “चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग से गौरवान्वित भारत की गौरवशाली अंतरिक्ष यात्रा” विषय पर चर्चा की शुरुआत में उपराष्ट्रपति ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया कि चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाले देश के रूप में पहले स्थान पर स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि के साथ, भारत 2025 तक चंद्रमा पर मानव को भेजने के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाली बहुपक्षीय पहल, आर्टेमिस समझौते का सदस्य बन गया है।
उपराष्ट्रपति ने छह दशकों से अधिक की भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए रेखांकित किया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम विदेशी लॉन्च व्हिकलों पर निर्भरता से स्वदेशी लॉन्च क्षमताओं के साथ पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का साक्षी रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल अपने उपग्रहों को लॉन्च करने की क्षमता विकसित की है, बल्कि अन्य देशों के लिए उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए अपनी सेवाओं का विस्तार भी किया है। अब तक 424 विदेशी उपग्रह लॉन्च किए जा चुके हैं।
चंद्रमा की सतह से आगे भारत की उपलब्धियों की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सदन को याद दिलाया कि भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) 2014 में अपने पहले प्रयास में सफलतापूर्वक मंगल ग्रह पर पहुंच गया था। हाल ही में लॉन्च किए गए आदित्य-एल1 मिशन और वीनस का अध्ययन करने के लिए आगामी शुक्रयान-1 मिशन को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ग्रहों की खोज और सुदूर अंतरिक्ष अभियानों पर ध्यान केंद्रित करना देश की विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष प्रयासों का उपयोग करने के इसरो के प्रयासों का एक स्वाभाविक विस्तार था।
उपराष्ट्रपति ने “नासा और ईएसए जैसी प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों की तुलना में बहुत कम लागत” पर इन उपलब्धियों को अर्जित करने में सक्षम होने की इसरो की शक्ति को स्वीकार करते हुए जोर देकर कहा कि यह निम्न लागत स्वदेशीकरण पर बल देने और आयात पर निर्भरता कम करने का परिणाम है।
उपराष्ट्रपति ने 2023 की भारतीय अंतरिक्ष नीति को अंतरिक्ष अन्वेषण में अधिक नवोन्मेषी और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की दिशा में एक “विशाल छलांग” के रूप में संदर्भित करते हुए कहा कि अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में निजी उद्यमों का प्रवेश भारत अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएँ के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा।
यह रेखांकित करते हुए कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों ने “देश को वैश्विक केंद्र-बिंदु पर पहुंचा दिया है”, उपराष्ट्रपति ने भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा को “राष्ट्रीय गौरव” का विषय बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, “चंद्रयान मिशन से लेकर चंद्रमा तक, मार्स ऑर्बिटर मिशन (मंगलयान) और आदित्य-एलएल के सौर अन्वेषण से, भारत ने दिखाया है कि हमारा लक्ष्य आसमान से भी ऊंचा है, यह तो बस शुरुआत है।”
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