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इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF) 2025 समावेशन, सुदृढ़ डिजिटल ढांचे और जिम्मेदार एआई के लिए स्पष्ट विज़न के साथ संपन्न

इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (आईआईजीएफ-2025) का पाँचवाँ संस्करण आज इंडिया हैबिटैट सेंटर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में दो-दिन की चर्चाओं के साथ संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में केंद्रीय मंत्रालयों, प्रौद्योगिकी कंपनियों, नागरिक समाज संगठनों, विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत में एक खुले, विश्वसनीय और समावेशी इंटरनेट इकोसिस्टम कैसे विकसित किया जाए, इस पर विचार-विमर्श किया।

“विकसित भारत के लिए समावेशी और सतत इंटरनेट गवर्नेंस को आगे बढ़ाना” विषय-वस्तु के अनुरूप फोरम ने तीन उप-विषयों—समावेशी डिजिटल भविष्य, लचीले और सतत विकास के लिए डिजिटल अवसंरचना और लोगों, दुनिया और विकाश के लिए एआई—की समीक्षा की। पैनल और कार्यशालाओं में ग्रामीण कनेक्टिविटी, ओपन डिजिटल सिस्टम, डोमेन नेम और डीएनएस सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तैयारी, भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विकास, डेटा संरक्षण, सामग्री विनियमन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नैतिक उपयोग तथा युवा इन्नोवेटर के लिए अवसर जैसे विषय शामिल थे।

कार्यक्रम में चार पैनल चर्चाओं और बारह कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इनमें क्षेत्रीय, नीतिगत और सामुदायिक दृष्टिकोण सामने आए। संयुक्त राष्ट्र इंटरनेट गवर्नेंस फोरम, मेटा, गूगल क्लाउड, सीसीएओआई तथा कई शिक्षण संस्थानों के वक्ताओं ने वैश्विक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखे। इससे इंटरनेट गवर्नेंस पर अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भारत के प्रयासों की व्यापक रूपरेखा स्थापित हुई।

फोरम का उद्घाटन करते हुए इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (एम. ई. आई. टी. वाई) जितिन प्रसाद ने कहा की “इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल क्षेत्र में प्रगति तभी संभव है जब सभी मिलकर कार्य करें। हमारा ध्यान हर नागरिक को सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय इंटरनेट उपलब्ध कराने पर है। मजबूत 5G कवरेज, सुदृढ़ डिजिटल सार्वजनिक सिस्टम और सहमति-आधारित डेटा संरक्षण अधिनियम के साथ हम ऐसा वातावरण बना रहे हैं जो लोगों की सुरक्षा करता है और नए अवसर खोलता है। हमारे जैसे बड़े देश को वास्तविक साइबर जोखिमों का सामना करना पड़ता है और इनका प्रबंधन केवल सरकार का काम नहीं है। उद्योग, शिक्षाविद और नागरिक समाज—सभी की भूमिका सुरक्षित ऑनलाइन स्पेस बनाने में महत्वपूर्ण है। भारत इंटरनेट गवर्नेंस में वैश्विक सहयोग को निरंतर समर्थन देगा, विशेषकर उन देशों के लिए जिन्हें अभी भी इंटरनेट उपलब्धता में कठिनाइयां हैं। हमारा उद्देश्य साफ है—अंतिम छोर तक पहुंचना और सुनिश्चित करना कि तकनीक का लाभ वास्तव में सभी को मिले।”

एम. ई. आई. टी. वाई के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा की “इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम भारत की डिजिटल यात्रा में हुई उल्लेखनीय प्रगति और एआई के आगमन से उत्पन्न चुनौतियों—दोनों को रेखांकित करता है। लगभग एक अरब ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं के साथ इंडिया स्टैक ने न केवल ग्लोबल साउथ बल्कि विकसित देशों के लिए भी जन-स्तरीय मॉडल प्रस्तुत किया है। हालांकि इस प्रकार का व्यापक पैमाना बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। विश्वास, सुरक्षा और लचीलापन बढ़ाना आवश्यक है, क्योंकि साइबर हमले, भ्रामक जानकारी और डिजिटल तकनीकों के दुरुपयोग का प्रभाव सभी पर पड़ता है। उपयोगकर्ता संरक्षण को मजबूत करना और इंटरनेट का समर्थन करने वाली मूलभूत प्रणालियों को सुदृढ़ करना समन्वित कार्रवाई से ही संभव है। हमारा सामूहिक उद्देश्य सुरक्षित और खुला इंटरनेट सुनिश्चित करना है। जिस पर उपयोगकर्ता भरोसा कर सकें। हमें इंटरनेट के विभिन्न तकनीकी स्तरों पर कार्य करते हुए इंटरनेट लचीलापन बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।”

एन आई एक्स आई के सीईओ डॉ. देवेश त्यागी ने कहा की “इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम इस सरल लेकिन शक्तिशाली विश्वास पर खड़ा है कि भारत की इंटरनेट कहानी बहु-हितधारक मॉडल का पालन करने वाले अनेक भागीदारों द्वारा लिखी जाएगी। आईआईजीएफ की विशेषता है, एक ऐसा मंच जहां हर आवाज महत्वपूर्ण है। आईआईजीएफ यात्रा के सबसे गौरवपूर्ण परिणामों में से एक यह रहा है कि सूचित और समावेशी निर्णय-निर्माण के लिए संस्थागत तंत्र मजबूत हुआ है। इंटरनेट के भविष्य, डोमेन नेम्स और नंबर्स, तथा इंटरनेट प्रोटोकॉल एवं मानकों पर विशेष रुचि समूह गहन विशेषज्ञता और व्यापक संवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा: “एन आई एक्स आई इंटरनेट इंटर्न योजना ने पिछले वर्ष में 10 हज़ार से अधिक छात्रों तक पहुंच बनाई है और उनमें से कई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग ले रहे हैं। दस से अधिक छात्रों ने पहले ही विश्वभर में भूमिकाएं प्राप्त कर ली हैं। इनमें से अधिकांश नीति ढांचे से संबंधित हैं।”

सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने कहा कि सार्वभौमिक और सार्थक पहुंच भारत की डिजिटल यात्रा के केंद्र में रहनी चाहिए। चर्चाओं में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को मजबूत बनाने और सुदृढ़ मानकों और समन्वित प्रयासों के माध्यम से विश्वास निर्माण की आवश्यकता को भी रेखंकित किया गया।

फोरम का समापन इस साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि भारत और विश्व के लिए एक अधिक सुरक्षित, समावेशी और लचीला इंटरनेट निर्मित किया जाएगा।

आईआईजीएफ के बारे में

इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम, संयुक्त राष्ट्र इंटरनेट गवर्नेंस फोरम का राष्ट्रीय अध्याय है। वर्ष 2021 में स्थापित इस फोरम में बहु-हितधारक स्वरूप अपनाया गया है। इसमें सरकार, नागरिक समाज, उद्योग, तकनीकी समुदाय और शिक्षाविद समान रूप से योगदान देते हैं। विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली 14-सदस्यीय समिति फोरम के कार्यों को दिशा प्रदान करती है। आईआईजीएफ-2025 का आयोजन 27–28 नवंबर को नई दिल्ली में किया गया। उद्घाटन सत्र इंडिया हैबिटैट सेंटर में और दूसरे दिन के सत्र इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुए।

अधिक विवरण और आईआईजीएफ समुदाय में शामिल होने लेने के लिए देखें: https://indiaigf.in/

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