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आयुष मंत्रालय के सह-आयोजन WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाया गया

आयुष मंत्रालय सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप, कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल तरीकों को अपना रहा है और उनका प्रचार-प्रसार कर रहा है। हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में डब्ल्यूएचओ के साथ आयुष मंत्रालय की सह-मेजबानी में आयोजित डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन में इसकी साफ झलक दिखी। इस प्रयास से लगभग 72,960 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ 2)के बराबर कार्बन उत्सर्जन में कमी आई। अनुमान है कि इस सम्मेलन में 50 हजार से अधिक प्लास्टिक की बोतलें और 30,000 एकल उपयोग वाली प्लास्टिक कटलरी के इस्तेमाल से बचा गया। यह शिखर सम्मेलन पूरी तरह से कागज रहित था और इसमें उपस्थिति ज्यादातर ऑनलाइन थी, जिससे परिवहन उत्सर्जन को यथासंभव कम किया जा सका। इसमें प्रतिनिधियों को प्लास्टिक के बजाय प्राकृतिक तरीके से सड़नशील (बायोडिग्रेडेबल) पदार्थों से बने बैज दिये गए थे और प्रदर्शनी क्षेत्र में केवल उन्हीं सामग्री का उपयोग किया गया जिनका फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

शिखर सम्मेलन में एक अनूठी पहल देखी गई, जहां प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों के बैज प्राकृतिक तरीके से सड़नशील (बायोडिग्रेडेबल) पदार्थों से बने थे और इसमें इस्तेमाल कागज में बीज (गेंदा) का प्रयोग रोपण में किया जा सकता है । सम्मेलन की पूरी अवधि के दौरान बायो-डिग्रेडेबल कटलरी और कांच की बोतलों का उपयोग किया गया, हवाई अड्डे पर पहचानसूचक ज्यादातर डिजिटल थे और कुछ बड़े आउटडोर होर्डिंग्स कपड़े पर बने थे, फ्लेक्स पर नहीं जैसा कि आम चलन है। प्रदर्शनी स्थल का 90% हिस्सा लकड़ी का उपयोग करके बनाया गया था जिसमें वास्तविक पौधों और फिर से इस्तेमाल हो सकने वाली सामग्रियों का व्यापक उपयोग हुआ था। यह शिखर सम्मेलन कागज रहित था और सभी मीडिया कार्यक्रम और संबंधित दस्तावेज़ ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और ऐप (उदाहरण के लिए, ब्रोशर/फ्लायर्स, सूचना पुस्तिकाएं, सम्मेलन कार्यक्रम अपडेट आदि) के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह की पहलों का लंबे समय में बड़ा प्रभाव पड़ेगा और कार्बन उत्सर्जन में कमी के लिए की गई पहल ऐसे अन्य बड़े पैमाने के आयोजनों के लिए प्राथमिकता हो सकती है।

शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख जोर ऑनलाइन उपस्थिति पर था, जिससे आवागमन की आवश्यकता कम हो। कुल मिलाकर, शिखर सम्मेलन की 6,046 स्ट्रीम ऑनलाइन हुई हैं, इसमें लाइव और वीडियो/रिकॉर्डिंग दोनों शामिल हैं। इससे आयोजन स्थल पर प्रतिभागियों/यात्राओं की संख्या में काफी कमी आई। यह प्रयास रंग लाया और बड़ी मात्रा में कार्बन उत्सर्जन होने से बचा लिया गया।

आयुष मंत्रालय और डब्ल्यूएचओ के ये प्रयास जी-20 नई दिल्ली लीडर्स घोषणा से जुड़े हैं, जो मध्य शताब्दी तक या उसके आसपास वैश्विक शुद्ध शून्य जीएचजी उत्सर्जन/कार्बन तटस्थता प्राप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराता है।

चौथी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए-4) ने मार्च 2019 में, “एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के प्रदूषण से निपटना” (यूएनईपी/ईए.4/आर.9) पर एक संकल्प लिया, जो “सदस्य राज्यों को एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के लिए पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की पहचान और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में कार्रवाई करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

न केवल हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में संपन्न पहले डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के दौरान, बल्कि अप्रैल 2022 में आयोजित अन्य दो वैश्विक कार्यक्रम, यानी डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (जीसीटीएम) का ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह और 3 दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन (जीएआईआईएस) में भी मंत्रालय की यही प्रतिबद्धता देखी गई।

इन दोनों कार्यक्रमों के दौरान 1 लाख से अधिक प्लास्टिक की बोतलें, 15000 प्लास्टिक टैग और 50 हजार प्लास्टिक कटलरी के उपयोग से बचा गया। इसके अलावा, यह अनुमान लगाया गया कि यदि कार्बन उत्सर्जन परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए आकलन किया जाए, तो यह 1,19,437.5 किलोग्राम Co2 के बराबर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफल रहा।

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