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आयुष मंत्रालय की सह-मेजबानी में WHO द्वारा गांधीनगर में आयोजित पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ

केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि आयुष मंत्रालय की सह-मेजबानी में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) द्वारा गांधीनगर में आयोजित पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ है। उन्होंने कहा, ‘इस वैश्विक शिखर सम्मेलन के नतीजे को गुजरात घोषणा पत्र के रूप में जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी किया जाएगा। डब्‍ल्‍यूएचओ ने इस शिखर सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा पर वैश्विक सर्वेक्षण के शुरुआती निष्कर्षों को भी साझा किया जिससे स्पष्ट तौर पर संकेत मिलता है कि दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा की पहुंच बढ़ रही है। डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार अंतिम सर्वेक्षण इसी साल नवंबर में जारी किया जाएगा।’

केंद्रीय मंत्री ने संवाददाताओं से बात करते हुए गुजरात घोषणा पत्र के महत्व के बारे में भी बताया और कहा कि डब्ल्यूएचओ द्वारा घोषणा पत्र को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। मंत्री ने दोहराया, ‘गुजरात घोषणा पत्र में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि सार्वभौम स्‍वास्‍थ्‍य कवरेज (यूएचसी) सुनिश्चित करने में पारंपरिक चिकित्सा के महत्व को मान्यता दी गई है। डब्‍ल्‍यूएचओ साक्ष्य तैयार करते हुए और सदस्य देशों को नीति समर्थन देते हुए इस दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा की बढ़ती स्वीकार्यता के बारे में बात करते हुए सोनोवाल ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पर ताजा वैश्विक सर्वेक्षण के शुरुआती निष्कर्षों को भी इस शिखर सम्मेलन के प्रतिभागियों के सामने रखा गया और उन पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि अंतिम सर्वेक्षण इस साल नवंबर में जारी किया जाएगा। इस सर्वेक्षण के शुरुआती निष्कर्षों से पता चलता है कि डब्‍ल्‍यूएचओ के 157 सदस्य देशों में से 97 में पारंपरिक चिकित्सा संबंधी राष्ट्रीय नीतियां मौजूद हैं।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के कार्य और दायरे में विस्तार के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से बताया। उन्‍होंने कहा कि नेपाल, मलेशिया, कतर, वेनेजुएला और क्यूबा के साथ पांच द्विपक्षीय बैठकें काफी सफल साबित हुई हैं। भारत ने द्विपक्षीय बैठक में शामिल सभी देशों को पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और भारत में चल रहे कार्यों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया है। इन द्विपक्षीय बैठकों ने करारों को नवीनीकृत करने और आयुर्वेद एवं अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में अनुसंधान, सर्वोत्‍तम प्रथा, शिक्षा एवं प्रशिक्षण के लिए तमाम पहल करने का अवसर प्रदान किया है।

मंत्री ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पर आयोजित पहले वैश्विक शिखर सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की दृढ़ प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के लिए भी याद किया जाएगा। उनकी दूरदर्शिता के कारण ही गुजरात के जामनगर में पारंपरिक चिकित्सा का पहला वैश्विक केंद्र स्थापित हुआ और उसके बाद पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन भी भारत में आयोजित किया गया। इस शिखर सम्मेलन के महत्व का अंदाजा इस तथ्य से ही लगाया जा सकता है कि इस कार्यक्रम के परिणाम से न केवल वैश्विक पारंपरिक चिकित्‍सा केंद्र के कामकाज का दायरा निर्धारित करने में मदद मिलेगी बल्कि पारंपरिक चिकित्‍सा पर 2025-2034 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के रणनीति दस्तावेज में भी इसकी झलक दिखेगी।

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा में उभरते क्षेत्रों के बारे में भी बात की। उन्‍होंने कहा, ‘डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की वैश्विक स्तर पर मांग है। पारंपरिक चिकित्सा में पूरी मानव जाति को साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की जबरदस्त क्षमता है। इन मुद्दों पर शिखर सम्मेलन में विस्तार से चर्चा की हुई है। आने वाले समय में जामनगर के वैश्विक पारंपरिक चिकित्‍सा केंद्र के जरिये काफी महत्वपूर्ण काम किए जाएंगे।’

केंद्रीय मंत्री ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस शिखर सम्मेलन का एक अन्‍य लाभ यह हुआ है कि इसे जी20 देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित किया गया। इससे विभिन्न देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों को जी20 प्‍लेटफॉर्म पर पारंपरिक चिकित्सा के बारे में चर्चा करने का अवसर मिला। जी20 देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के परिणामों से भी सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लिए वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित पारंपरिक चिकित्सा के उपयोग के लिए सदस्य देशों की प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है।

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