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स्वामित्व योजना के तहत अधिकारों के रिकॉर्ड की बैंकिंग संबंधी योग्यता पर गोलमेज चर्चा आयोजित की गई

उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान (बीआईआरडी) में स्वामित्व संपत्ति कार्ड की बैंकिंग संबंधी योग्यता पर एक गोलमेज चर्चा आयोजित की गई।

इस गोलमेज चर्चा का आयोजन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए एक वित्तीय संपत्ति के रूप में अपनी संपत्ति का उपयोग करने में सक्षम बनाकर वित्तीय स्थिरता लाने के उद्देश्यों को साकार करने के लिए किया गया। इसकी अध्यक्षता पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव आलोक प्रेम नागर ने की। इस दौरान यशदा (यशवंतराव चव्हाण विकास प्रशासन प्रबोधिनी) के महानिदेशक एस चोकालिंगम और बीआईआरडी के निदेशक निरूपम मेहरोत्रा उपस्थित थे। वहीं, इस मामले के विशेषज्ञ व पेशेवर व्यक्तियों जैसे कि राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी), राज्य विभाग व पंजीकरण विभाग के अधिकारी, बैंक अधिकारी, भारतीय रिजर्व बैंक के वित्तीय सेवाओं के प्रतिनिधियों ने चर्चा में हिस्सा लिया।

इस चर्चा के दौरान संपत्ति कार्ड को निर्णायक टाइटिल (स्वत्व अधिकार) के साक्ष्य के रूप में उपयोग करने, संपत्ति कार्ड की हस्तांतरणीयता, आबादी भूमि का मूल्यांकन, बैंक वित्त के लिए प्रमाणितकर्ता के रूप में संपत्ति कार्ड का उपयोग करने की संभावना, पंजीकरण की आवश्यकता आदि को रेखांकित करने के लिए पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इन चर्चाओं के व्यापक विषय राज्यों में संपत्ति कार्डों के लिए पंजीकरण प्रावधानों, राज्यों में आबादी भूमि पर अतिक्रमणों की नोटिंग प्रक्रिया, आबादी क्षेत्रों में सरफेसी अधिनियम आदि से संबंधित थे।

इस चर्चा का आयोजन बैंकर ग्रामीण विकास संस्थान (बीआईआरडी) ने किया। इसके पैनलिस्टों में उत्तर प्रदेश पंजीकरण विभाग सहित राष्ट्रीयकृत बैंक जैसे कि इंडियन बैंक, केनरा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक और क्षेत्रीय बैंक जैसे कि प्रथम यूपी ग्रामीण बैंक, उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव बैंक, बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक और एसएलबीसी के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा पैनल में कर्नाटक के सर्वे आयुक्त मंजुनाथन, कर्नाटक के राजस्व आयुक्त पीएस कुमार, गुजरात एसएसएलआर के आयुक्त एम ए पांड्या, मध्य प्रदेश भूमि रिकॉर्ड्स के संयुक्त निदेशक अखिलेश जैन, उत्तराखंड के राजस्व आयुक्त चंद्रेश कुमार सहित हरियाणा, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड के अधिकारी शामिल थे।

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