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आत्मनिर्भरता और सुरक्षित सीमाएं एक शक्तिशाली ‘न्यू इंडिया’ की कुंजी हैं, इसकी आधारशिला रखी जा चुकी है: रक्षा मंत्री

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आत्मनिर्भरता और सुरक्षित सीमाएं भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के लिए केंद्रीय हैं।” रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में भारत को वर्ष 2047 तक सबसे शक्तिशाली राष्ट्रों में से एक बनाने के लिए सरकार के परिवर्तन लाने के अटूट संकल्प को व्यक्त किया, साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि रक्षा मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण की प्राप्ति में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बलों को एक आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग द्वारा निर्मित अत्याधुनिक हथियारों/उपकरणों से लैस करने पर दिए जा रहे सरकार के ध्यान को रेखांकित किया। उन्होंने सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची जारी करने सहित आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए अनेक कदमों को सूचीबद्ध किया। हाल ही में कमीशन किए गए आईएनएस विक्रांत- जिसमें 76 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है- का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास आधुनिक हथियारों और प्लेटफार्मों के निर्माण करने की योग्यता व क्षमता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश अगले दस वर्षों में आधुनिक और प्रभावी जल, भूमि, आकाश एवं अंतरिक्ष रक्षा प्लेटफार्मों का निर्माण शुरू कर देगा।

रक्षा मंत्री ने इस तथ्य की सराहना की कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण रक्षा निर्यात में भारी उछाल आया है। उन्होंने कहा, “एक समय था जब भारत केवल 1,900 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों का निर्यात करता था। आज यह आंकड़ा 13,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। हमने 2025 तक 1.75 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जिसमें 35,000 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है। हम लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अग्रसर हैं।”

सीमा क्षेत्र के विकास को सरकार के दृष्टिकोण का एक अन्य पहलू बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सशस्त्र बलों की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने हेतु सभी प्रयास किए जा रहे हैं एवं दूर दराज के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को देश से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, पूर्वोत्तर राज्यों में सशस्त्र बलों एवं आम जनता के बीच असाधारण तालमेल और उनकी देशभक्ति की सराहना की।

रक्षा मंत्री ने उत्तर-पूर्व को भारत का ऐसा हाथ बताया, जिसे आजादी के बाद लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर की प्रगति प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक रही है, क्योंकि शुरुआत से ही यह क्षेत्र देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और रणनीतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि,”पिछले 8.5 वर्षों में हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि पूर्वोत्तर राज्यों में शांति एवं समृद्धि की बहाली रही है। वर्ष 2014 के बाद से पूर्वोत्तर के लगभग हर राज्य में हिंसा की घटनाओं में लगभग 80-90 प्रतिशत की कमी आई है। अधिकांश चरमपंथी संगठन या तो जड़ से उखाड़ दिए गए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। 80 प्रतिशत क्षेत्रों से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम को हटा दिया गया है। यह इसलिए संभव हुआ क्योंकि अब इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और स्थायित्व है।”

रक्षा मंत्री ने पूर्वोत्तर के साथ कनेक्टिविटी को पिछले 8.5 वर्षों में सरकार की एक और उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि हवाई, सड़क एवं रेल संपर्क के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है और अब इस क्षेत्र से सीधा संबंध है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम-डिवाइन) की केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी को पूर्वोत्तर राज्यों की प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्रगति एक मजबूत, समृद्ध व आत्मनिर्भर ‘न्यू इंडिया’ बनाने के लिए महत्वपूर्ण है, जैसी कि प्रधानमंत्री के दृष्टि रही है।

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की सराहना की जिनके नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था अधिक गतिशील एवं मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि देश में स्टार्ट-अप की संख्या 2014 में सिर्फ 400 से कई गुना बढ़कर अब 75,000 हो गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से 100 से अधिक को दुनिया भर में एक अरब डॉलर के मूल्यांकन के कारण यूनिकॉर्न के रूप में जाना जाता है।

रक्षा मंत्री ने कहा, “आज, अधिकांश देश अर्थव्यवस्था में मंदी की समस्या का सामना कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2022-23 में अपनी वैश्विक जीडीपी विकास दर 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। जबकि भारत की विकास दर को कम करके आंका गया है, यह अभी भी 6.1 प्रतिशत पर आंकी गई है। दुनिया भारत की विकास गाथा की ओर देख रही है।”

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