अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यु सुक येवोल ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर मोहर लगा दी है। इसके अंतर्गत परमाणु हथियारों से लैस अमरीकी पनडुब्बियों को समय-समय पर दक्षिण कोरियाई क्षेत्रों में तैनात करने की योजना है। इसके साथ ही अमेरिका अब उत्तर कोरिया के साथ किसी भी संघर्ष की स्थिति में परमाणु हथियारों के उपयोग की योजना में दक्षिण कोरिया को भी शामिल करने पर सहमत हो गया है। इसके बदले में दक्षिण कोरिया ने अपने परमाणु हथियार नहीं विकसित करने की रजामंदी दी है। कल वाशिंगटन में राष्ट्रपति युन के साथ संवाददाताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि इस रक्षा समझौते को वाशिंगटन घोषणा पत्र का नाम दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता उत्तर कोरिया के आक्रमण को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूती प्रदान करेगा।
इस बीच, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तर कोरिया के खतरे को देखते हुए वाशिंगटन घोषणा-पत्र व्यापक प्रतिरोध की दिशा में अभूतपूर्व कदम है। इसके अंतर्गत अमरीका ने परमाणु हथियारों सहित अपनी सैन्य शक्ति के उपयोग से विरोधियों के आक्रमण को रोकने और मित्र देशों की सुरक्षा की वचनबद्धता व्यक्त की है। यह घोषणा-पत्र उत्तर कोरिया की ओर से परमाणु हमले की धमकियों को लेकर बढ़ती चिन्ता के बीच जारी किया गया है क्योंकि उत्तर कोरिया ने अब तक रिकार्ड संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है।
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