विदेशमंत्री डॉ0 सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि भारत और नाइजीरिया दोनों देश अपने नागरिकों के बीच आपसी सम्पर्क मजबूत करने और ऊर्जा, आवागमन तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। उन्होंने अबूजा में नाइजीरिया के विदेशमंत्री युसुफ टुग्गर के साथ भारत और नाइजीरिया के छठे संयुक्त आयोग की बैठक की भी सह-अध्यक्षता की।
इस दौरान ऊर्जा, नवीकरणीय सामग्रियों, परिवहन, स्वास्थ्य, वित्त प्रौद्योगिकी, कृषि और सुरक्षा संबंधी मामलों में सहयोग के अवसरों पर चर्चा हुई। सोशल मीडिया पोस्ट में डॉ0 जयशंकर ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, विशेष रूप से व्यापार और निवेश बढ़ाने का उल्लेख किया है।
नाइजीरिया यात्रा पर पहुंचे डॉ0 जयशंकर ने कहा कि विश्व में फिर से संतुलन की स्थिति और बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देने के साथ साथ स्वाभाविक विविधता की पुनर्स्थापना आज वैश्विक एजेण्डा है। लागोस में नाइजीरिया के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संस्थान में भारत और विकास के मामले में पिछड़े देशों के संबंध में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ0 जयशंकर ने कहा कि पिछले दशक में आए बदलाव ने भारत को विकास की दृष्टि से पिछड़ रहे देशों के लिए एक उदाहरण, साझेदार और ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया है, जो उनकी समस्याओं को सुलझाने में योगदान कर सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतियां नये आर्थिक परिदृश्य और पुराने तरीके के वर्चस्व से उत्पन्न हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के क्षेत्र में पिछडना एक मानसिकता को प्रकट करता है और आत्मनिर्भरता तथा एकजुटता पर जोर देता है।
विदेशमंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि विकास के मामले में पिछड़े देशों को आगे बढ़ाये बगैर विश्व में बड़े पैमाने पर प्रगति नहीं देखी जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता की एक बड़ी उपलब्धि यह भी है कि इस दौरान जी-20 देशों का ध्यान फिर से उन देशों की ओर आकर्षित किया जा सका, जो विकास के मामले में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान दौर में सतत् विकास के लक्ष्यों, स्वच्छ और हरित विकास, महिलाओं के नेतृत्व में विकास, स्वास्थ्य, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं।
डॉ जयशंकर ने बाद में अबूजा में भारत नाइजीरिया व्यापारिक मंच को भी संबोधित किया।