ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जा रही है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देश-दुनिया में सबसे पुरानी है, जिसका वर्णन ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण और कपिला संहिता में पाया जाता है। वार्षिक उत्सव हर साल अषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है।
भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा पुरी के सारदा बाली के पास गुंडिचा मंदिर पहुंचेगी।
आज रथ यात्रा के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आज दोपहर गजपति महाराज दिब्यसिंह देब के द्वारा “छेरा पहनरा” रस्म के साथ प्रभू श्री जगन्नाथ, उनके बड़े भाई श्री बालभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने रथ में विराजमान होंगे और फिर सेवारतों के द्वारा रथ खींचे जायेंगे। आम तौर पर हजारों भक्तों के द्वारा रथ खींचे जाते हैं, लेकिन इस बार कोविड महामारी के चलते यह कार्य सेवारतों के द्वारा किया जा रहा है। इस बार पूरी रथ यात्रा में प्रत्यक्ष रूप में जो करीब आठ हजार लोग शामिल हो रहे हैं। उन सबका कोविड परीक्षण कर लिया गया है। लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से पूरी में कर्फ्यू लगा दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की भीड़ इकट्ठा न हो पाये। हालांकि देवाताओं के लाखों भक्त छोटे पर्दे पर उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकते हैं।
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