केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उर्वरक विभाग की पहल की आज समीक्षा की। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा भी इस दौरान उपस्थित थे। उर्वरक विभाग के सचिव आर के चतुर्वेदी और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
मनसुख मंडाविया ने कहा कि, रामागुंडम संयंत्र के शुरू होने के साथ ही देश में 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष स्वदेशी यूरिया का उत्पादन प्रारंभ हो गया है और इससे यूरिया उत्पादन में भारत को ‘आत्मनिर्भर’ (सेल्फ रिलाइअन्ट) बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वप्न को साकार करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना से न केवल किसानों को आसानी से उर्वरक की उपलब्धता में वृद्धि होगी बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के अलावा सड़कों, रेलवे तथा सहायक उद्योग आदि जैसे बुनियादी ढांचे के विकास सहित देश की अर्थव्यवस्था को इससे बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि, सरकार वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास सहायता (एमडीए) नीति को उदार बनाने की योजना बना रही है। इससे पहले यह नीति केवल शहरी खाद (कम्पोस्ट) तक ही सीमित थी। इसमें जैविक कचरे जैसे बायोगैस, हरित खाद, ग्रामीण क्षेत्रों की जैविक खाद, ठोस/तरल घोल आदि को शामिल कर इस नीति के विस्तार की मांग की गई है। यह विस्तार भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान का पूर्ण रूप से पूरक साबित होगा।
रसायन एवं उर्वरक मंत्री को यह अवगत कराया गया कि, दुर्गापुर में 12.7 लाख मीट्रिक टन क्षमता का मैटिक्स उर्वरक सयंत्र जल्द ही शुरू होगा।
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