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UNESCO और MeitY ने भारत में एआई रेडीनेस असेसमेंट मेथडोलॉजी (आरएएम) पर हितधारक परामर्श की मेजबानी की

दक्षिण एशिया के लिए यूनेस्को के क्षेत्रीय कार्यालय ने इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी), भारत सरकार और कार्यान्वयन भागीदार के रूप में इकिगाई लॉ के सहयोग से भारत में एआई रेडीनेस असेसमेंट मेथडोलॉजी (आरएएम) पर दो दिवसीय हितधारक परामर्श का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 16 तारीख को आईआईआईटी बैंगलोर और 17 तारीख को नैसकॉम एआई कार्यालय में आयोजित किया गया।

भारत की एआई नीति को आकार देने के लिए दूसरा एआई आरएएम परामर्श

यह परामर्श यूनेस्को और माइटी द्वारा एआई आरएएम पहल के तहत पांच परामर्शों की श्रृंखला में दूसरा था। इस पहल का उद्देश्य भारत-केंद्रित एआई नीति रिपोर्ट तैयार करना है, जिसमें भारत के एआई इकोसिस्टम के भीतर क्षमता और विकास के अवसरों की पहचान की जाएगी। रिपोर्ट सभी क्षेत्रों में एआई के जिम्मेदारी और नैतिकता पूर्ण तरीके से अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने योग्य समझ प्रदान करेगी। एआई आरएएम विशेष रूप से एआई विनियामक और संस्थागत क्षमता निर्माण प्रयासों में सरकारों के लिए अवसरों की पहचान करने के उद्देश्य से एक नैदानिक ​​उपकरण के रूप में कार्य करता है। भारत के अपने एआई विकास को तेजी से आगे बढ़ाने के साथ, इससे शासन को नैतिक सिद्धांतों के साथ जोड़ने से सुरक्षा और विश्वास पर केंद्रित एक समग्र एआई इकोसिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

दिन 1: विविध हितधारकों को शामिल करना

16 तारीख को हुए परामर्श में भारत के एआई इकोसिस्टम को यूनेस्को की एआई की नैतिकता पर वैश्विक अनुशंसा में नैतिक सिद्धांतों के साथ संरेखित करने के लिए रणनीतियों का पता लगाने के उद्देश्य से सरकार, शिक्षा, उद्योग और नागरिक समाज के विविध हितधारकों को एक साथ लाया गया, जिसमें पारदर्शिता, समावेशिता और निष्पक्षता पर जोर दिया गया।

दिन 2: स्टार्टअप पर जोर

17 तारीख को, स्टार्टअप पर जोर के साथ ऐसा ही कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब भारत अपने महत्वाकांक्षी इंडियाएआई मिशन पर काम कर रहा है, जिसे ₹10,000 करोड़ से अधिक का वित्तपोषण मिला है। मिशन का केंद्र बिंदु सुरक्षित और विश्वसनीय एआई पिलर है, जो एआई विकास और उसे लागू करने में सुरक्षा, जवाबदेही और नैतिक प्रथाओं को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। स्वदेशी ढांचे, मजबूत शासन के टूल और स्व-मूल्यांकन दिशानिर्देशों को बढ़ावा देकर, मिशन का उद्देश्य नवोन्मेषकों को सशक्त बनाना और सभी क्षेत्रों में एआई के लाभों का लोकतंत्रीकरण करना है।

दोनों कार्यक्रमों में विशेषज्ञ प्रस्तुतियां, ब्रेकआउट सत्र और चर्चाएं शामिल थीं, जो जिम्मेदार एआई अपनाने में कदम उठाने योग्य समझ प्रदान करती हैं:

यूनेस्को के सामाजिक और मानव विज्ञान के कार्यकारी कार्यालय की प्रमुख डॉ. मारियाग्राजिया स्क्विसियारिनी ने कहा कि आरएएम का उद्देश्य किसी देश के एआई परिदृश्य- उसके बुनियादी ढांचे, कानून, घटकों और प्रमुख हितधारकों की एक व्यापक झलक प्रदान करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विविध आवाजों को शामिल करके, यह अवसरों की पहचान करता है और एआई में संभावित कमियों को दूर करता है, साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि इसकी परिवर्तनकारी क्षमता को पूरी अर्थव्यवस्था में जिम्मेदारी से महसूस किया जाए।

माइटी में अपर सचिव अभिषेक सिंह ने अपने संबोधन में जिम्मेदार शासन में निहित संतुलित और नवाचार-अनुकूल एआई वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने इंडियाएआई मिशन के सात स्तंभों के बारे में गहन जानकारी दी, जिसमें कंप्यूटिंग क्षमता, व्यापक डेटासेट तक पहुंच, कौशल निर्माण पहल, स्टार्टअप वित्तपोषण और एआई में सुरक्षा और विश्वास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला गया।

अपर सचिव ने यूनेस्को और माइटी की एआई की नैतिकता पर यूनेस्को की सिफारिशों को भारत के बेजोड़ एआई इकोसिस्टम के अनुरूप ठोस नीतिगत कार्यों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने जिम्मेदार एआई विकास और उसे लागू करने का नेतृत्व करने की भारत की क्षमता पर प्रकाश डाला, जिससे विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) को लाभ होगा। उन्होंने शिक्षा, उद्योग और सरकार के सहयोग से समावेशी, पारदर्शी और सुरक्षित तौर-तरीकों द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सामाजिक भलाई के लिए एआई को लागू करने में एक उदाहरण स्थापित करने के भारत के अनूठे अवसर को भी रेखांकित किया।

परियोजना प्रस्तुतीकरण: इंडियाएआई मिशन के सुरक्षित और विश्वसनीय एआई स्तंभ के हिस्से के रूप में, स्वदेशी जिम्मेदार एआई परियोजनाओं के लिए पहली ईओआई के तहत छांटी गई एक परियोजना ने अपना काम प्रस्तुत किया। इसमें, सिविक डेटा लैब्स के सह-संस्थापक और निदेशक दीप्ति चंद ने परख एआई प्रस्तुत किया, जो सहभागी एल्गोरिद्मिक ऑडिटिंग के लिए एक ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क और टूलकिट है।

भारत के एआई रोडमैप का निर्माण

ब्रेकआउट सत्रों में शासन, बुनियादी ढांचे, कार्यबल और क्षेत्रीय एआई अपनाने सहित प्रमुख क्षेत्रों पर गहन चर्चा की सुविधा प्रदान की गई। प्रतिभागियों ने भारत के एआई नीति रोडमैप की नींव को आकार देते हुए बहुमूल्य जानकारियां प्रदान कीं। इन भागीदारीपूर्ण प्रयासों का उद्देश्य खामियों को दूर करना, अवसरों को प्राथमिकता देना और नैतिकता पूर्ण एआई तौर-तरीके सुनिश्चित करना है जो सामाजिक कल्याण में योगदान करते हैं।

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