प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज ‘कृषि बुनियादी ढांचा कोष’ के अंतर्गत वित्तपोषण सुविधा की केंद्रीय क्षेत्र योजना में निम्नलिखित संशोधनों को अपनी मंजूरी दे दी:
अब पात्रता का विस्तार राज्य एजेंसियों/एपीएमसी, राष्ट्रीय और राज्य सहकारी समितियों के परिसंघों, किसान उत्पादक संगठनों के परिसंघों (एफपीओ) तथा स्वयं सहायता समूहों के परिसंघों (स्वयं सहायता समूहों) तक किया गया है।
वर्तमान में एक स्थान पर 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए ब्याज सहायता की पात्रता है। यदि एक पात्र इकाई विभिन्न स्थानों पर परियोजनाएं लगाती है तो ऐसी सभी परियोजना 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए ब्याज सहायता की पात्र होंगी। लेकिन निजी क्षेत्र की इकाई के लिए ऐसी परियोजनाओं की अधिकतम सीमा 25 होगी। 25 परियोजनाओं की यह सीमा राज्य की एजेंसियों, राष्ट्रीय और राज्य सहकारी समितियों के परिसंघों, एफपीओ के परिसंघों और स्वयं सहायता समूहों के महासंघों पर लागू नहीं होगी। स्थान का मतलब एक गांव या शहर की सीमा होगी जिसमें एक अलग एलजीडी (स्थानीय सरकारी निर्देशिका) कोड होगा। ऐसी प्रत्येक परियोजना एक अलग एलजीडी कोड वाले स्थान पर होनी चाहिए।
एपीएमसी के लिए एक ही बाजार यार्ड के भीतर विभिन्न बुनियादी ढांचे के प्रकारों जैसे कोल्ड स्टोरेज, सार्टिंग,ग्रेडिंग और परख इकाइयों, साइलो आदि की प्रत्येक परियोजना के लिए 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए ब्याज सहायता प्रदान की जाएगी।
लाभार्थी को जोड़ने या हटाने के संबंध में आवश्यक परिवर्तन करने के लिए माननीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री को शक्ति प्रदान की गई है ताकि योजना की मूल भावना में परिवर्तन न हो।
वित्तीय सुविधा की अवधि 2025-26 तक 4 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दी गई है और 2032-33 तक इस योजना की कुल अवधि 10 से बढ़ाकर 13 कर दी गई है।
इस योजना में संशोधनों से निवेश जुटाने में गुणक प्रभाव प्राप्त करने में मदद मिलेगी, जबकि यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचे। एपीएमसी मार्केट बाजार संपर्क प्रदान करने और सभी किसानों के लिए फसल कटाई के बाद सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को खुला रखने के लिए इकोसिस्टम बनाने के लिए स्थापित किए जाते हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि, सहकारिता तथा किसान कल्याण विभाग के नारियल विकास बोर्ड के अध्यक्ष पद को गैर-कार्यकारी बनाने के प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति दे दी है। इससे बड़े पैमाने पर नारियल उत्पादकों को लाभ होगा।
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