तृष्णा ना जाये मन से, दोहा मथुरा वृन्दावन सघन, और यमुना के तीर, धन्य धन्य माटी सुघर, धन्य कालिंदी नीर।… Read More
जो मै ऐसा जानती, प्रीत करे दुख होय, नगर ढिंढोरा पीटती, प्रीत ना करिये कोई। एक बार तो राधा बनकर… Read More
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