भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने 2 मई, 2023 को ‘गठबंधन’ विषय पर सदस्य देशों, पर्यवेक्षकों तथा शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के संवाद साझीदारों के साथ एक वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया गया था।
सम्मेलन की अध्यक्षता फार्मास्यूटिकल्स विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार अवधेश कुमार चौधरी द्वारा की गई। सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित विशेषज्ञों द्वारा बहुत विस्तृत एवं समृद्ध प्रस्तुतियां दी गईं :
कोलकाता के राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. वी रविचंद्रन और भारतीय फार्मास्यूटिकल एलायंस के वरिष्ठ तकनीकी सलाहकार डॉ. श्रीधर नारायण ने ‘‘उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों और दुर्लभ रोगों के संदर्भ में चिकित्सकीय पहुंच में सुधार तथा संवर्द्धित विनिर्माण और विरासत में मिले दुर्लभ रोगों के लिए नए उपचारों पर शोध” विषय पर प्रस्तुति।
वैज्ञानिक-एफ एवं भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महामारी विज्ञान एवं संचारी रोग (ईसीडी) प्रभाग की प्रमुख डॉ. निवेदिता गुप्ता द्वारा ‘‘संक्रामक रोगों के लिए नई नैदानिकी का विकास एवं सत्यापन” विषय पर प्रस्तुति।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की डॉ. मनीषा श्रीधर तथा डॉ. मधुर गुप्ता और जैवप्रौद्योगिकी विभाग की डॉ. कलाइवाणी गणेशन द्वारा ‘‘नैदानिकी एवं चिकित्सा के लिए नए प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकीयों का विकास एवं सत्यापन” विषय पर प्रस्तुति।
फाउंडेशन फॉर इनोवेटिव न्यू डायग्नोटिक्स ( एफआईएनडी ) के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी मार्टा फर्नांडीज सुवारेज और एसोसिएशन ऑफ डायग्नोस्टिक मैन्यूफैक्चरर्स के भास्कर मल्लाडी द्वारा ‘‘प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर चरणों में दुर्लभ रोगों सहित बीमारियों के आणविक परीक्षण के लिए लागत प्रभावी नैदानिकी पैनल/ किट का विकास” विषय पर प्रस्तुति।
इंडिया स्ट्रेटजी डेवलपमेंट ग्लोबल एंटीबायोटिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट पार्टनरशिप (जीएआरडीपी) के प्रधान सलाहकार डॉ. वाई के गुप्ता एवं यान फेरिस द्वारा ‘‘एपीआई के लिए हरित प्रौद्योगिकी एवं प्रक्रिया दक्षता” विषय पर प्रस्तुति।
डॉ. पी के एस सरमा, महाप्रबंधक ( जीएम ) एवं प्रमुख – तकनीकी, बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टैंस काउंसिल रिप्रजेनटेटिव द्वारा ‘‘प्रयोगशाल से बाजार तक प्रौद्योगिकीयों को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक-निजी साझीदारियां” विषय पर प्रस्तुति।
इन प्रस्तुतियों की अत्यधिक सराहना की गई और एससीओ के कुछ सदस्यों ने उनके संबंधित देशों में हो रहे कार्यों तथा भारत के साथ सहयोग की संभावना पर अपडेट दिया। कोविड-19 और स्वास्थ्य आपात स्थितियों से उभरते खतरों ने देशों को टीकों, चिकित्सा एवं नैदानिकी के क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कार्यकलापों में गठबंधन के मूल्य का अहसास कराया है। भारत इस क्षेत्र में एक मजबूत विनिर्माण आधार बन गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के समय विभिन्न देशों की सहायता करने में भारत हमेशा सबसे आगे रहा है तथा आगे भी ऐसा करता रहेगा।
इस सम्मेलन ने भारत सरकार के विभिन्न विभागों में आरंभ किए जा रहे अत्याधुनिक कार्यों तथा किस प्रकार एससीओ के सदस्यों और अन्य साझीदार देशों के साथ गठबंधन करने के लिए इसका लाभ उठाया जा सकता है, में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान की।
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