शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के सदस्य देशों से जुड़े विज्ञान और तकनीकी मामलों के विशेषज्ञों ने साल 2022-2025 के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर ड्राफ्ट एक्शन प्लान बनाने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर एससीओ सदस्यों देशों की बैठक में चर्चा की।
साल 2022-2025 के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर ड्राफ्ट एक्शन प्लान पर सभी सदस्य देशों ने सहमति जताई। बैठक में प्राथमिकता वाले चार क्षेत्रों की पहचान की गई। उभर रहे चिकित्सा/जैव प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा, प्रीसिशन एग्रीकल्चर के लिए आधुनिक तकनीक।
विज्ञान और तकनीक विभाग से जुड़े इंटरनेशनल कॉपरेशन डिविजन के सलाहकार और प्रमुख एस. के. वार्ष्णेय ने भारतीय पक्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक, तकनीकी और नवप्रवर्तनशील सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एससीओ ढांचे के महत्व को रेखांकित किया।
वार्ष्णेय ने 2020 के नवंबर में भारत में सम्पन्न एससीओ से जुड़े युवा वैज्ञानिकों के सम्मेलन के बारे में भी सदस्यों को जानकारी दी, जिसमें एससीओ देशों के 65 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिकों के सम्मेलन में सदस्य देशों को युवाओं के साथ सहयोग स्थापित करने से वैज्ञानिक और रणनीतिक तौर पर बढ़त मिली। उन्होंने एससीओ बैठकों के पिछले सत्रों में चिन्हित क्षेत्रों पर भी सदस्य देशों के विशेषज्ञों से प्रकाश डालने का आग्रह किया, ताकि वर्तमान ड्राफ्ट एक्शन प्लान के दायरे और समयसीमा पर निर्णय लिया जा सके।
विशेषज्ञों के समूह ने एससीओ के सदस्य देशों के विज्ञान और तकनीकी मामलों के मंत्रालयों और एजेंसियों के प्रमुखों की पांचवीं बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की स्थिति पर भी चर्चा की। सभी सदस्यों ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से जुड़े ड्राफ्ट एक्शन प्लान में समन्वय पर चर्चा करते हुए इस बात पर सहमति जताई कि शोध और मानवीय सेवा क्षेत्र के सभी रूपों के बीच के अंतर को पाटने के लिए एससीओ क्षेत्र में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तकनीकी नेटवर्क्स महत्वपूर्ण हैं।
बैठक के दौरान एससीओ सदस्य देशों के विज्ञान और तकनीकी मामलों के मंत्रालयों और एजेंसियों के प्रमुखों ने 2022 के अप्रैल में छठी बैठक का आयोजन करने पर सहमति जताई।
शंघाई कॉपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) की स्थापना 2001 में छह सदस्य देशों के प्रमुखों द्वारा की गई। ये देश हैं- रूस, चीन, कजाकिस्तान, किरगिज रिपब्लिक, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान। भारत और पाकिस्तान 2017 में इस संगठन में शामिल हुए। एससीओ का मुख्य लक्ष्य यूरेशियाई क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
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