शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) फिल्म महोत्सव के पहले दिन आज “एनीमेशन के उपयोग से अनंत दुनिया बनाना” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई। ग्रेफिटी मल्टीमीडिया के निदेशक और सीओओ मुंजाल श्रॉफ और टून्ज़ एनिमेशन के सीईओ जयकुमार प्रभाकरन ने भारतीय एनीमेशन उद्योग में काम करने के अपने अनुभव और इसके विकास के लिए अपने विजन को साझा किया।
मुंजाल श्रॉफ ने अपनी रचना ‘दीपा एंड अनूप’ की लोकप्रियता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों को भारतीय संदर्भ से जोड़ना इस सीरीज को बनाने के पीछे प्रमुख प्रेरणा थी। उन्होंने ये भी बताया कि कैसे उन्होंने लीसा गोल्डमैन को शामिल किया ताकि इसमें कुछ ‘अमेरिकी स्वाद’ भी जोड़ा जा सके और ये सीरीज सिर्फ भारतीय प्रतिनिधित्व वाली ही न रह जाए।
जयकुमार प्रभाकरन ने इस मौके पर एनीमेशन कॉन्टेंट के सामाजिक आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने चर्चा की कि कैसे बच्चे अपनी आदतें और अपने तौर तरीके कार्टून से सीखते हैं। इसलिए सिनेमा और टेलीविजन सांस्कृतिक आविष्कार में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
इस सत्र में इस पर भी चर्चा हुई कि कैसे भारतीय लोकगीतों ने दुनिया भर के दर्शकों का ध्यान खींचा है। तेनाली रमन और अकबर-बीरबल जैसे पात्रों ने कई पीढ़ियों को दीवाना बना रखा है। इन पैनलिस्टों ने बात की कि स्थानीय कॉन्टेंट को बढ़ावा देने के लिए उन्हें अपने करियर की शुरुआत में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा क्योंकि प्रमुख वैश्विक ब्रांडों और वितरकों के साथ साझेदारी आर्थिक रूप से अव्यवहारिक साबित हुई थी।
व्हिस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल के उपाध्यक्ष चैतन्य चिंचिलकर द्वारा संचालित इस चर्चा में भारतीय एनिमेशन उद्योग के विकास और इसके भविष्य के रोडमैप का भी पता लगाया गया।
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