भारतीय स्टेट बैंक ने मुफ्त सुविधाओं की घोषणा के प्रति चेतावनी देते हुए कहा है कि भविष्य में इससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ सकता है। एसबीआई ने कहा है कि कीमतों में बदलाव तथा संसाधनों के गलत तरीके से आवंटन के कारण अक्षमता पैदा हो सकती है।
तीन राज्यों का उदाहरण देते हुए भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा है कि छत्तीसगढ़, झारखंड और राजस्थान में वार्षिक पेंशन देनदारी का बोझ अनुमानित तौर पर तीन लाख करोड़ रुपये है।
आर्थिक रिपोर्ट में स्टेट बैंक ने सुझाव दिया है कि उच्चतम न्यायालय की समिति इस तरह की कल्याण योजनाओं को राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद के एक प्रतिशत या उनके अपने कर संग्रह के एक प्रतिशत तक सीमित कर सकती है। रिपोर्ट में बजट से अलग राज्यों के ऋणों पर भी उंगली उठाई गई है, जो उनकी अपनी संस्थाओं से लिए गए हैं और जिनकी गारंटी राज्यों ने दी है। इस तरह के ऋण इस वर्ष तक सकल घरेलू उत्पाद के चार दशमलव पांच तक पहुंच गए हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मुफ्त सुविधाओं के साथ-साथ यदि आकस्मिक खर्च के बोझ को जोड़ दिया जाए तो यह सभी राज्यों के सकल राज्य घरेलू उत्पाद के दस प्रतिशत तक हो सकता है।
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