प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 देश के लाखों युवाओं के सपनों को पंख लगा देगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की पहली वर्षगांठ के अवसर पर शिक्षा जगत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश जब स्वतंत्रता प्राप्ति के 75वें वर्ष के प्रवेश द्वार पर खडा है तब यह नीति देश के भविष्य को सुनहरा बनाने में महत्वपूर्ण भमिका निभाएगी। उन्होंने इस अवसर पर शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण पहलों की शुरूआत की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के कारण समूचे शिक्षा क्षेत्र पर विपरित प्रभाव पडा, लेकिन विद्यार्थियों ने जल्द ही एक बडे बदलाव के साथ ऑनलाइन शिक्षा पद्धति को अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत का युवा, डिजिटल भारत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को अनावश्यक परीक्षा के बोझ से मुक्ति दिलाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इससे पहले, विद्यार्थी पढाई के लिए विदेश जाते थे, लेकिन जल्द ही वे अपने देश में ही विश्वस्तरीय शिक्षा हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत वे अपनी मातृ भाषा में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे और उन्हें इसके लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि आठ राज्यों के 14 इंजीनियरिंग कॉलेजों में पांच भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। ये भाषाए हैं – हिन्दी, तमिल, तेलुगु, मराठी और बांग्ला। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम के 11 भारतीय भाषाओं में अनुवाद के लिए एक टूल का विकास भी किया गया है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का शुभारंभ किया। इससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश तथा निकासी और इंजीनियरिंग कार्यक्रम के प्रथम वर्ष की क्षेत्रीय भाषाओं में पढाई के विकल्प और उच्च शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए दिशा-निर्देश उपलब्ध होंगे।
ग्रेड-1 के लिए तीन महीने का खेल आधारित स्कूल तैयारी मॉड्यूल, सैकेंडरी स्तर पर एक विषय के रूप में भारतीय संकेत भाषा और एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया गया एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम–निष्ठा दो की भी शुरूआत की गई है।
इनके अलावा आंकलन लर्निंग लेवल–सफल के लिए संरचित मूल्यांकन, सीबीएसई स्कूलों में ग्रेड तीन, पांच और आठ के लिए प्रतियोगिता आधारित मूल्यांकन कार्य संरचना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए समर्पित वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि निष्ठा- दो से ना केवल शिक्षकों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, बल्कि वे विभाग को अपने मूल्यवान सुझाव भी दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय संकेत भाषा को भी बढावा मिलेगा, जिससे दिव्यांग विद्यार्थियों को लाभ होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब सैकेंडरी स्तर पर भारतीय संकेत भाषा को एक विषय के रूप में पढाया जाएगा।
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