एनटीपीसी और सीमेन्स लिमिटेड ने एनटीपीसी के फरीदाबाद गैस विद्युत संयंत्र में स्थापित सीमेन्स वी94.2 गैस टर्बाइनों में प्राकृतिक गैस के साथ मिश्रित हाइड्रोजन को-फायरिंग की व्यवहार्यता दिखाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। फरीदाबाद गैस विद्युत संयंत्र की कुल स्थापित क्षमता 432 मेगावाट है, जिसमें दो वी94.2 गैस टर्बाइन संयुक्त चक्रीय मोड में परिचालित रहे हैं। एनटीपीसी लिमिटेड के निदेशक (परियोजना) उज्ज्वल कांति भट्टाचार्य और सीमेन्स लिमिटेड के महाप्रबंधक सत्य प्रकाश चौधरी एन की उपस्थिति में इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर दोनों कंपनियों ने हस्ताक्षर किए।
डी-कार्बोनाइजिंग (कार्बन उत्सर्जन को कम करना) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी ऊर्जा गहन क्षेत्रों में एक समेकित और व्यापक रोडमैप की जरूरत होती है। इस रोडमैप के एक हिस्से के तहत गैस टर्बाइनों में हाइड्रोजन को-फायरिंग कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत में सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी होने के साथ ही एनटीपीसी लिमिटेड ऊर्जा रूपांतरण और सीओपी-26 प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभाने का संकल्प रखता है।
इस पहल के एक हिस्से के तहत एनटीपीसी हाइड्रोजन के उपयोग के साथ-साथ विभिन्न नई हाइड्रोजन पीढ़ी प्रौद्योगिकियों की खोज कर रहा है, जिससे भविष्य की तैयारी सुनिश्चित की जा सके, जरूरी क्षमताओं व तकनीकी विशेषज्ञता को विकसित की जा सके और राष्ट्रीय डी-कार्बोनाइजिंग व हाइड्रोजन मिशन लक्ष्यों के साथ इसे समन्वित किया जा सके।
इस समझौता ज्ञापन के तहत दोनों कंपनियां फरीदाबाद गैस विद्युत संयंत्र में हाइड्रोजन को-फायरिंग शुरू करने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने के लिए सहभागिता करेंगी। इन व्यवहार्यता अध्ययनों के आधार पर क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए 5 फीसदी (मात्रा के अनुसार) हाइड्रोजन को-फायरिंग के लिए एक प्रायोगिक परियोजना लागू की जा सकती है और इस परियोजना के लिए जरूरी हाइड्रोजन की व्यवस्था एनटीपीसी करेगी।
एनटीपीसी लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक मनीष कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “एनटीपीसी हाइड्रोजन से संबंधित विभिन्न पहलों में अग्रणी है और इस क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधान व विकास कार्य कर रही है, जिससे एक ऐसी तकनीक लाई जा सके, जो सभी के लिए हरित, सस्ती, विश्वसनीय और टिकाऊ विद्युत प्रदान कर सके। यह समझौता ज्ञापन इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए एनटीपीसी के उठाए गए कुछ कदमों में से एक है। हरित हाइड्रोजन कम कीमत पर उपलब्ध होने की स्थिति में हाइड्रोजन को-फायरिंग मौजूदा एनटीपीसी गैस परिसंपत्तियों का उपयोग करने में सहायता करने के साथ गैस संयंत्रों से उत्पादित विद्युत की लागत को कम कर सकती है। साथ ही, ये गैस टर्बाइन नवीकरणीय काल के दौरान ग्रिड को लचीलापन प्रदान करने और ग्रिड को स्थिर करने में सहायता कर सकते हैं। हमें विश्वास है कि इस तकनीक में वैश्विक विशेषज्ञता रखने वाली सीमेन्स लिमिटेड के साथ साझेदारी करने से हमें राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत अपने उद्देश्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।”
वहीं, सीमेन्स लिमिटेड के सेवा और डिजिटल प्रमुख (ऊर्जा) आशीष सरीन ने कहा, “यह समझौता ज्ञापन (एमओयू) दिखाता है कि भारत ने अपनी ऊर्जा रूपांतरण और डी-कार्बोनाइजेशन की यात्रा को तेज कर दिया है। हमें एनटीपीसी के साथ सहभागिता पर बहुत गर्व है, क्योंकि हमारा मानना है कि हम मिलकर मौजूदा और भविष्य की विद्युत प्रणालियों को अधिक कुशल, लचीला और टिकाऊ बना सकते हैं।”
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