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कांगो के चिकित्सक डेनिस मुकवेगे और यजीदी कार्यकर्ता नादिया मुराद को शांति का नोबेल पुरस्कार

Nobel Prize for Peace of Congo doctor Dennis Mukwege and Yadidi worker Nadia Murad

नोबेल पुरस्कारों में शुक्रवार को शांति के पुरस्कार की घोषणा की गई. इस बार दिए गये ये पुरस्कार शोषण को ही अपना हथियार बनाने का उदाहरण पेश करते हैं. डीआर कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे और आईएस के आतंक का शिकार हुई यजीदी रेप पीड़िता नादिया मुराद को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना है. यौन हिंसा के खिलाफ प्रभावी मुहिम चलाने और महिला अधिकारों के लिए उत्कृष्ट कार्य के बदले यह सम्मान दिया गया है.

इस साल के बहुप्रतीक्षित नोबेल शांति पुरस्कार का एलान हो गया है. कांगो के चिकित्सक डेनिस मुकवेगे और यजीदी कार्यकर्ता नादिया मुराद को विश्वभर के युद्धग्रस्त क्षेत्रों में यौन हिंसा के खिलाफ काम करने के लिए 2018 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया. नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रेइस एंडरसन ने यहां नामों की घोषणा करते हुए कहा कि यौन हिंसा को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के इनके प्रयासों के लिए इन दोनों को चुना गया है.

63 साल के मुकवेगे को युद्ध प्रभावित पूर्वी लोकतांत्रिक कांगो गणराज्य में यौन हिंसा और बलात्कार पीड़ित महिलाओं को हिंसा और सदमे से बाहर निकालने के क्षेत्र में दो दशक तक काम करने के लिए चुना गया है. मुकवेगे ने 1999 में दक्षिण कीव में पांजी अस्पताल खोला था, जहां उन्होंने बलात्कार पीड़ित लाखों महिलाओं, बच्चों और यहां तक कि कुछ माह के शिशुओं का भी उपचार किया है. इन्हें ‘डॉक्टर मिरैकिल’ के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ ही वह युद्ध के दौरान महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुखर विरोधी हैं.

मुकवेगे के अलावा समिति ने मुराद को भी नोबेल शांति पुरस्कर के लिए चुना है. मुराद ईराक से हैं और यजीदी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं. आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ने उन्हें 2014 में अगवा कर लिया था. आंतकवादियों के चंगुल से फरार होने से पहले तीन महीने तक इन्हें यौन दासी बना कर रखा गया था. नार्वे की नोबेल समिति ने कहा कि ‘डेनिस मुकवेगे और नादिया मुराद दोनों ने युद्ध अपराधों के खिलाफ लड़ाई छेड़ने और पीडि़तों को न्याय की मांग करके अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डाला है. इस प्रकार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को लागू कर देशों के बीच भाईचारे का प्रचार प्रसार किया है. संयुक्त राष्ट्र ने इस एलान का स्वागत किया है.

गौरतलब है कि इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए 331 व्यक्तियों और संगठनों को नामित किया गया था. यह पुरस्कार 10 दिसंबर को प्रदान किया जाएगा.

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