गंगा उत्सव का 5वां संस्करण काफी धूमधाम के साथ वर्चुअल तरीके से शुरू हुआ। बहुप्रतीक्षित ‘गंगा उत्सव 2021 – द रिवर फेस्टिवल’ न केवल गंगा नदी बल्कि देश की सभी नदियों की महिमा का जश्न मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘नदी उत्सव’ यानी नदियों का उत्सव मनाने के आह्वान से प्रेरणा लेकर गंगा उत्सव को भारत के सभी नदी घाटियों तक ले जाने का उद्देश्य है।
ट्री क्रेज फाउंडेशन के सहयोग से एनएमसीजी द्वारा विकसित कंटीन्यूअस लर्निंग एंड एक्टिविटी पोर्टल (सीएलएपी) को लॉन्च किया गया
कंटीन्यूअस लर्निंग एंड एक्टिविटी पोर्टल (सीएलएपी) का शुभारंभ माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा ‘गंगा उत्सव – द रिवर फेस्टिवल 2021’ के उद्घाटन के दिन किया गया। सीएलएपी नमामि गंगे की एक पहल है जिसे ट्री क्रेज फाउंडेशन की सीईओ भावना बडोला के नेतृत्व में ट्री क्रेज फाउंडेशन द्वारा विकसित एवं निष्पादित किया गया है। सीएलएपी भी विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित एवं समर्थित है। यह एक संवादात्मक पोर्टल है जो भारत में नदियों के संरक्षण एवं उससे संबंधित मामलों में पहल करने की दिशा में काम कर रहा है। यह पोर्टल चर्चा एवं परिचर्चा को सुविधाजनक बनाने और पर्यावरण, जल, नदी आदि से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार व्यक्त करने का एक मंच भी है।
हर साल गंगा उत्सव को भव्य बनाने के लिए एनएमसीजी को बधाई देते हुए गेजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा, ‘हमारी नदियों का जीर्णोद्धार और संरक्षित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि वह नदियों के संरक्षण में किस प्रकारअपना योगदान दे सकता है।’
गंगा उत्सव के पीछे के इतिहास एवं दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए जल शक्ति मंत्रालय के सचिव पंकज कुमार ने कहा कि एनएमसीजी पूरे साल विभिन्न गतिविधियों के जरिये लगातार जनता से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘गंगा क्वेस्ट को काफी सफलता मिली थी। सीएलएपी लोगों के लिए साल भर क्विज एवं अन्य गतिविधियों में भाग लेने का एक अवसर होगा।’
एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने लोगों को सलाह दी कि वे गंगा उत्सव का न केवल आनंद लें बल्कि गंगा एवं अन्य सभी नदियों के जीर्णोद्धार के लिए संदेशवाहक एवं कार्यकर्ता बनने का आनंद उठाएं। उन्होंने बताया कि इस केंद्रीय आयोजन में न केवल हजारों लोग वर्चुअल तरीके से भाग ले रहे हैं बल्कि गंगा उत्सव के तहत विभिन्न जिलों में 100 से अधिक कार्यक्रमों के लिए योजना बनाई गई है। उन्होंने ‘गंगा टास्क फोर्स’ के नेतृत्व में एक अभियान ‘गंगा मशाल’ के बारे में भी बताया। इसे दिल्ली से झंडी दिखाकर रवाना किया गया था और यह गंगा नदी के किनारे 23 स्टेशनों को कवर करने वाले मार्ग से यात्रा करेगी। इस प्रकार यह स्थानीय लोगों और नमामि गंगे स्वयंसेवकों को संवेदनशील बनाने में मदद करेगी। उन्होंने गंगा विचार मंच, गंगा दूत (एनवाईकेएस), गंगा प्रहरी, गंगा मित्र एवं अन्य सभी को उनके अथक कार्य के लिए धन्यवाद दिया और गंगा मशाल को सफल बनाने की अपील की।
एनएमसीजी ने ‘गंगा उत्सव – द रिवर फेस्टिवल 2021’ के पहले दिन फेसबुक पर एक घंटे के दौरान हस्तलिखित नोटों के साथ अपलोड किए गए सर्वाधिक तस्वीरों के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी पंजीकरण दर्ज किया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने गंगा के बारे में फेसबुक पर अपना संदेश पोस्ट किया जिसके बाद गिनीज गतिविधि को आम जनता के लिए खोल दिया गया। महज एक घंटे के दौरान इस गतिविधि के तहत लाखों प्रविष्टियां दर्ज की गईं। जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी विशेष रूप से प्रेरक थी। कई लोगों ने स्वयं के बनाए साहित्यिक रचनाओं को कार्यक्रम के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए। गंगा कायाकल्प पर जागरूकता बढ़ाने और गंगा उत्सव – द रिवर फेस्टिवल 2021 की पहुंच को गति देने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड गतिविधि का आयोजन किया गया था। डीजी एनएमसीजी ने गंगा के संरक्षण के लिए अपने संदेश पोस्ट करने के वाले सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया।
जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने ‘गंगा एटलस: रिवर ऑफ द पास्ट’ का भी विमोचन किया। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर राजीव सिन्हा द्वारा तैयार किया गया गंगा एटलस में पिछले 5-6 दशकों के दौरान गंगा नदी में हुए परिवर्तन का दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। ये बदलाव मुख्य तौर पर चैनल मॉरपोलॉजी, भूमि उपयोग एवं भूमि कवर, नदी की गतिशीलता एवं अन्य संबंधित मुद्दों के संदर्भ में हैं। एनएमसीजी द्वारा वित्त पोषित इस शोध परियोजना के तहत आईआईटी कानपुर ने एक वर्कफ्लो भी विकसित किया है जो उपयोगकर्ताओं को न्यूनतम लागत पर नदी के वातावरण की अवर्गीकृत इमेजरी का विश्लेषण करने और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की अनुमति देता है।
प्रसिद्ध लेखक एवं कवि अशोक चक्रधर ने गंगा एवं अन्य नदियों पर कविताएं सुनाई। उनकी मजाकिया एवं विनोदपूर्ण शैली ने मनोरंजक तरीके से नदी संरक्षण का संदेश दिया। इस कार्यक्रम के दौरान कई संगीत और नृत्य का प्रदर्शन भी किया गया। सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल ने अपनी मनमोहक आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में राहुल शर्मा के संतूर पर शास्त्रीय संगीत का प्रदर्शन किया और दर्शक प्राची शाह पंड्या के कथक नृत्य से मंत्रमुग्ध हो गए।
यह उत्सव दो और दिनों तक अर्थात् 2 और 3 नवंबर 2021 तक जारी रहेगा। एनएमसीजी के कार्यकारी निदेशक (वित्त) रोजी अग्रवाल ने बताया कि अगले दो दिनों के लिए कहानी, सांस्कृतिक प्रदर्शन एवं कई अन्य कार्यक्रमों की योजना तैयार की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले सप्ताहों में भी विभिन्न स्थानों पर नदी उत्सव के तौर पर इसे मनाया जाता रहेगा।
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