खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने प्रकृति से प्लास्टिक के खतरे को कम करने के लिए विकसित अपने अभिनव प्लास्टिक-मिश्रित हस्तनिर्मित कागज के लिए पेटेंट पंजीकरण प्राप्त कर लिया है। पेटेंट प्रमाणपत्र केवीआईसी के कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (केएनएचपीआई) जयपुर को 2 अगस्त 2021 को भारत के पेटेंट महानियंत्रक बौद्धिक संपदा द्वारा जारी किया गया। प्लास्टिक-मिश्रित हस्तनिर्मित कागज विकसित करने का विचार सितंबर 2018 में कल्पित हुआ और मात्र दो महीनों में ही यानी कि, नवंबर 2018 में इस परियोजना को केएनएचपीआई में वैज्ञानिकों के एक दल द्वारा निष्पादित किया गया था।
प्लास्टिक-मिश्रित हस्तनिर्मित कागज को प्रोजेक्ट रिप्लान (प्रकृति से प्लास्टिक को कम करना) के तहत विकसित किया गया था। यह भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना है, जहां प्लास्टिक कचरे को डि-स्ट्रक्चर्ड, डिग्रेडेड, डाइलूटड किया जाता है तथा इसे हस्तनिर्मित कागज बनाते समय पेपर पल्प के साथ इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार प्रकृति से प्लास्टिक कचरे को कम करने में सहायता मिलती है। यह उपलब्धि सिंगल यूज प्लास्टिक के खतरे से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के अनुरूप है।
इस पेटेंट को प्राप्त करना वास्तव में केवीआईसी के अद्वितीय नवाचार को एक बड़ी मान्यता है, जो पूरी दुनिया में अभूतपूर्व है। अपशिष्ट-प्लास्टिक मिश्रित हस्तनिर्मित कागज के उत्पादन से स्थायी रोजगार के अवसरों के सृजन के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के दोहरे उद्देश्यों की पूर्ति होने की संभावना है।
केवीआईसी और राज्य खादी बोर्डों के तहत देश में लगभग 2640 हस्तनिर्मित कागज बनाने वाली इकाइयों में हर वर्ष वातावरण से करीब 3000 मीट्रिक टन अपशिष्ट प्लास्टिक का शोधन करने की क्षमता है। साथ ही इसके माध्यम से अपशिष्ट प्लास्टिक के संग्रह, सफाई और प्रसंस्करण जैसे हजारों नए रोजगार भी पैदा किये जा सकते हैं। इसलिए, कहा जा सकता है कि, यह सतत विकास का एक उपयुक्त मॉडल है। केवीआईसी शीघ्र ही उद्यमियों को प्लास्टिक मिश्रित हस्तनिर्मित कागज बनाने के लिए प्रशिक्षण देना शुरू करेगा और घरेलू कागज उद्योग के साथ इस तकनीकी की जानकारी को साझा करेगा।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा विकसित तकनीक उच्च एवं निम्न घनत्व अपशिष्ट पॉलिथीन दोनों का उपयोग करती है, जो न केवल कागज को अतिरिक्त मज़बूती देती है बल्कि लागत को 34 प्रतिशत तक कम करती है। यह उत्पाद पुनः चक्रित करने योग्य और पर्यावरण के अनुकूल है। केवीआईसी ने प्लास्टिक मिश्रित हस्तनिर्मित कागज का उपयोग करके कैरी बैग, लिफाफे, फाइल / फोल्डर आदि जैसे कई उत्पाद विकसित किए हैं। केवीआईसी ने अब तक जयपुर शहर के लगभग 40 मीट्रिक टन अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग करते हुए 13 लाख से अधिक प्लास्टिक मिश्रित हस्तनिर्मित पेपर कैरी बैग बेचे हैं, और इससे लगभग 1.30 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है।
दिल्ली नवविवाहिता मौत मामला: दहेज केस में पति गिरफ्तार, पुलिस कर रही हर पहलू की… Read More
'सतलुज' विवाद गहराया! OTT से हटाई गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म, ZEE5 ने भारत में… Read More
Attack on Titan: The Last Attack को मिली भारत में रिलीज डेट, बड़े पर्दे पर… Read More
Wistoria: Wand and Sword Season 2 Review: पुराना फॉर्मूला, लेकिन जबरदस्त एक्शन और शानदार विजुअल्स… Read More
Canada vs Morocco: FIFA World Cup 2026 में Morocco ने Canada को हराकर क्वार्टर फाइनल… Read More
Paraguay vs France: France Today Match पर फुटबॉल फैंस की नजर Paraguay vs France मुकाबला… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment