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WHO क्षेत्रीय समिति के 74वें सत्र के लिए मंत्रिस्तरीय राउंडटेबल में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत की तरफ से हस्तक्षेप की पेशकश की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ.भारती प्रवीण पवार ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन- दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूएचओ-एसईएआरओ) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने डब्ल्यूएचओ क्षेत्रीय समिति के 74वें सत्र के लिए मंत्रिस्तरीय राउंडटेबल में दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत की तरफ से हस्तक्षेप की पेशकश की।

उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी सतत् विकास लक्ष्यों को हासिल करने और भविष्य के लिए स्वास्थ्य प्रणाली के लचीलेपन को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘बेहतर निर्माण’ के प्रस्तावित प्रमुख उपायों और रणनीतियों पर प्रकाश डाला।

कोविड-19 महामारी द्वारा जीवन के हर क्षेत्र के साथ ही जिंदगियों और आजीविकाओं को समान रूप से प्रभावित करने व जानमाल के नुकसान की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में, देश ने महामारी के प्रबंधन के लिए सक्रिय, समय-पूर्व, समग्र सरकार, समग्र समाज और जनता पर केंद्रित रणनीति अपनाई थी। हमारी तैयारी और प्रतिक्रिया रणनातियों में अपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के बारे में फैसला लेने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों के हमारे पिछले अनुभवों और बीमारी की उभरती प्रकृति से जुड़े समकालीन वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग किया गया। बीमारी से लड़ने की भारत की रणनीति पांच स्तम्भों- परीक्षण, निगरानी, उपचार, टीककरण और कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन पर टिकी है। एक विकेंद्रीकृत लेकिन एकीकृत, समग्र सरकार के दृष्टिकोण के साथ, हमारा जोर मुख्य रूप से कोविड समर्पित इन्फ्रास्ट्रक्चर और हमारे स्वास्थ्य कार्यबल को कुशल बनाने पर है।’

उन्होंने प्रवेश के बिंदुओं पर निगरानी जैसे भारत के मजबूत और निर्णायक नेतृत्व के साहसी फैसलों का उल्लेख किया,जिससे कोविड-19 की घुसपैठ और प्रसार कम हो गया और साथ ही देश को महामारी के प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षमताओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया था। उच्च स्तरीय अंतर मंत्रालयी समूहों की स्थापना और राज्यों, अन्य हितधारकों व समुदाय स्तर पर संवाद से स्थापित अंतर-क्षेत्रीय समन्वय से महामारी का प्रबंधन एक जनांदोलन के रूप में सामने आया। महामारी रोग अधिनियम (संशोधन) अधिनियम, 2020 जैसे- विधिक और नीतिगत प्रावधानों; केन्द्र और उप-राष्ट्रीय क्षेत्रों को पहले से उपलब्ध आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 ने राष्ट्रीय से स्थानीय स्तरों तक शासन के रूप में अंतर क्षेत्रीय समन्वय की सुविधा प्रदान करके भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करते हुए महामारी के सभी पहलुओं के संचालन ने एक सक्षम ढांचा उपलब्ध कराया है। साथ ही, रोकथाम, उपचार प्रोटोकॉल और कोविड प्रबंधन के सभी पहलुओं पर केंद्र सरकार द्वारा दिए गए तकनीक समर्थन ने एकीकृत प्रतिक्रिया सुनिश्चित की है।

भारत सरकार देश के विभिन्न क्षेत्रों में महामारी के प्रसार के आधार पर, नियमित रूप से बीमारी के बदलते रूप और देश तथा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इसके प्रसार की निगरानी करती है, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर कदम उठाने में सहायता मिल सके।

प्रयोगशाला, अस्पताल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डायग्नोस्टिक, वैक्सीन, आवश्यक लॉजिस्टिक पर आरएंडडी और मानव संसाधनों में सुधार से संबंधित मुख्य क्षमताओं को मजबूत बनाने के साथ ही व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण, डायग्नोस्टिक, वेंटिलेटर और वैक्सीन विनिर्माण क्षमताओं सहित आवश्यक लॉजिस्टिक से जुड़ी स्वदेशी क्षमताओं के विकास के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। इसी प्रकार, आईसीएमआर टेस्टिंग पोर्टल जैसे डिजिटल नवाचारों से देश भर में संक्रमण के प्रसार की निगरानी में सहायता मिली है; “आरोग्यसेतु” जैसे आईटी एप्लीकेशन से संपर्कों की निगरानी में सहायता मिली और कोविन से व्यापक टीकाकरण अभियान की निगरानी की गई; टेली-मेडिसिन और ई-आईसीयू से मरीजों की कोविड और गैर कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है।

महामारी की मानव लागत पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “विशेष रूप से समाज के गरीब और कमजोर तबकों पर कोविड-19 के अप्रत्यक्ष प्रभाव को महसूस करते हुए, खाद्यान्न की आपूर्ति, न्यूनतम आय समर्थन योजनाओं, लघु उद्योगों को समर्थन, कोविड-19 के चलते अपने अभिभावकों को खोने वाले बच्चों को समर्थन सहित कई सामाजिक सुरक्षा उपाय किए गए और कोविड-19 के प्रभाव को कम करने के लिए अन्य आर्थिक उपाय किए गए।”

भारत के विकास और वैश्विक स्वास्थ्य पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ ही टीके लगाने के व्यापक निहितार्थ पर, उन्होंने भारत की टीकाकरण रणनीति के मूलभूत सिद्धांत साझा किए, जिनमें टीकों के उत्पादन में बढ़ोतरी, टीकाकरण के लिए कमजोर समूहों को प्राथमिकता देना, दूसरे देशों से टीकों की खरीद के लिए प्रयास करना, दूसरे चरण के लिए टीका लगवाने वाले सभी लोगों की निगरानी के साथ अपेक्षित डिजिटल टीकाकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना शामिल है।

उन्होंने कहा, “कोविड-19 के लिए टीका प्रबंधन पर हमारा राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह वैक्सीन ट्रायल, टीके के समान वितरण, खरीद, वित्तपोषण, डिलिवरी तंत्र, जनसंख्या समूहों को प्राथमिकता आदि पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है और वैक्सीन विकास पर राष्ट्रीय कार्यबल कोरोना वायरस की दवा, डायग्नोस्टिक्स और वैक्सीन के शोध एवं विकास को समर्थन देता है।” लक्षित खंडों के लिए टीकाकरण को चरणबद्ध तरीके से खोलने का विवरण देते हुए, उन्होंने बताया कि भारत ने अपनी जनसंख्या के टीकाकरण में 68 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है।

भारत ने व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम के वर्तमान बुनियादी ढांचे का उपयोग किया है, जिसमें वैक्सीन और सिरिंज के लिए जरूरी लॉजिस्टिक के प्रबंधन के अलावा कोल्ड चेन रखरखाव सुनिश्चित करने के की दिशा में सुधार किया गया है। 2 लाख से ज्यादा वैक्सीनेटर और टीकाकरण दल के 3.9 लाख अन्य सदस्यों को प्रशिक्षण के अलावा राज्य स्तर पर 7,600 और जिला स्तर पर लगभग 61,500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के द्वारा सभी स्तरों पर क्षमता बढ़ाई गई है। टीका उत्पादन बढ़ाने के लिए, उत्पादन में सुधार के उद्देश्य से तकनीक के हस्तांतरण पर जोर के अलावा वैक्सीन विनिर्माताओं को अनुदान के रूप में वित्तीय समर्थन, ऑर्डर देने के लिए अग्रिम भुगतान, जोखिम पर विनिर्माण की अनुमति उपलब्ध कराई गई है। को-विन डिजिटल प्लेटफॉर्म ने पारदर्शी पंजीकरण और कोविड-19 टीकाकरण के लिए हर लाभार्थी की निगरानी के साथ ही वैक्सीन के उपलब्ध स्टॉक, उनके भंडारण तापमान, डिजिटल प्रमाण पत्रों की रियल टाइम जानकारी का समर्थन किया है।

उन्होंने यह कहते हुए अपना भाषण समाप्त किया कि भारत के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम से पता चलता है कि कैसे सभी हितधारकों की भागीदारी वाली विस्तृत योजना, परिचालन योजना का प्रभावी संवाद, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, तकनीक के उपयोग, अनुरकूलित कार्यक्रम कार्यान्वयन से एक मुश्किल कार्य को कुशलता के साथ पूरा किया जा सकता है।

Dheeru Bhargav

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