अर्थव्यवस्था को और मज़बूत करने के लिए आरबीआई बोर्ड की कल हुई बैठक में लिए गए कई अहम फैसले। भारत सरकार और रिर्जव बैंक के बीच अतिरिक्त संसाधनों के बंटवारे के लिए विशेष पैनल गठित करने का फैसला.
नौ घंटे तक चली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की बैठक में वित्तीय क्षेत्र के लिए नकदी बढ़ाने और छोटे उद्योगों को ज्यादा कर्ज देने पर सहमति बनी। बैठक के बाद आरबीआई ने कहा कि केंद्रीय बैंक के निदेशक मंडल ने आरबीआई को 25 करोड़ रुपये की कुल कर्ज सुविधा के साथ छोटे व मझोले उद्योगों की संकटग्रस्त परिसंपत्तियों का पुनर्गठन करने की योजना पर विचार करने को कहा है।
बैठक के दौरान बोर्ड ने नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरएआर को 9 फीसदी रखने का फैसला लिया। हालांकि, कैपिटल कंजर्वेशन बफर के तहत 0.625 फीसदी के आखिरी चरण को लागू करने के लिए ट्रांजिशन पीरियड को एक साल बढ़ाने पर सहमति बन गई। यह अवधि 31 मार्च, 2019 तक होगी। ऐसी अटकलें भी थीं कि बैठक के दौरान आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।
बोर्ड की अगली बैठक 14 दिसंबर को होगी। लोकसभा चुनाव, 2019 को देखते हुए सरकार छोटे व मझोले उद्योगों को राहत देने के लिए आरबीआई से कर्ज बढ़ाने और उन्हें राहत देने की मांग कर रही थी। हालांकि, केंद्रीय बैंक अपने सख्त नियमों में ढील देने को तैयार नहीं था। इस मुद्दे पर भी सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे।
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