विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के समान अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास केंद्र (सीआरटीडीएच) कार्यक्रम के अंतर्गत ’सीआरटीडीएच के माध्यम से सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना’’ विषय पर एक दिवसीय दूसरे चिंतन शिविर का समापन 24 अगस्त, 2023 को डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर, लखनऊ में हुआ। इस चिंतन शिविर का लक्ष्य शिक्षाविदों और उद्योग के बीच संबंधों को मजबूत बनाते हुए औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास में सहयोग को बढ़ावा देना और एक ऐसी संस्कृति को विकसित करना है, जो सूचना साझाकरण, सहयोगात्मक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सीआरटीडीएच देश में अनुसंधान एवं विकास कार्यों को बढ़ावा देता है और इसका व्यापक समर्थन करते हुए मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास-अनुकूल वातावरण को प्रोत्साहित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डीएसआईआर के सचिव और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी, भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), लखनऊ के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण और सीआरटीडीएच, डीएसआईआर की प्रमुख डॉ. सुजाता चकलानोबिस ने चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. एन. कलैसेल्वी ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” बनाने के दृष्टिकोण को पूर्ण करने के लिए एमएसएमई, स्टार्टअप और इनोवेटर्स को सक्षम बनाने में डीएसआईआर और सीआरटीडीएच के महत्व पर जोर दिया। डॉ. भास्कर नारायण ने विभिन्न हितधारकों को उनकी अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को पूरा करने में सहायता करने के लिए डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर, लखनऊ के प्रयासों की सराहना की। डॉ. सुजाता चकलानोबिस ने चिंतन शिविर में नवाचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एमएसएमई, नवाचार इको-सिस्टम के एक प्रमुख घटक के रूप में, भारत को वैश्विक स्तर पर अनुसंधान एवं विकास और विनिर्माण का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. सुजाता चकलानोबिस और डॉ. भास्कर नारायण ने प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार केंद्र में डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर सुविधा का उद्घाटन किया और डीएसआईआर-आईआईटीआर-सीआरटीडीएच वेबसाइट के अद्यतन संस्करण का शुभारंभ भी किया। डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर और एमएसएमई के साथ दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए गए।
सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ के निदेशक ने डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर में भविष्य के प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों पर जानकारी देते हुए विषयगत सत्रों के दौरान शिक्षा और एमएसएमई के बीच तालमेल के महत्व का उल्लेख किया। डॉ. पार्थसारथी और डॉ. बी श्रीकांत ने डीएसआईआर-आईआईटीआर-सीआरटीडीएच के अंतर्गत की गई गतिविधियों और एमएसएमई के लिए अवसरों का पता लगाने के प्रयासों पर एक जानकारी प्रदान की। एमएसएमई/स्टार्ट-अप/इनोवेटर्स के प्रतिभागियों को उनके अनुसंधान एवं विकास लक्ष्यों को समझने में आने वाली चुनौतियों पर विचार-मंथन करने के लिए पांच समूहों में विभाजित किया गया था और इसके बाद उस पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दी गई। विषयगत सत्र “संवाद” का समन्वयन डीएसआईआर के वैज्ञानिक-एफ डॉ. विपिन सी.शुक्ला द्वारा किया गया। ‘संवाद’ के दौरान, एमएसएमई, स्टार्टअप और इनोवेटर्स के सामने आने वाली प्रमुख कठिनाइयों पर चर्चा की गई और पीआई, डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर, लखनऊ द्वारा संभावित समाधानों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस कार्यक्रम में डीएसआईआर-सीआरटीडीएच-आईआईटीआर की पूरी टीम के साथ डीएसआईआर के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. रणजीत बैरवा और डॉ कैलाश पेटकर ने भाग लिया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्ट-अप, यूपी राज्य जिला संसाधन व्यक्ति, व्यक्तिगत नवप्रवर्तक और चैंबर ऑफ कॉमर्स, उद्योग संघ, एसोचैम के प्रतिनिधियों ने भी अनुसंधान एवं विकास प्रयासों में सीआरटीडीएच के लाभ प्राप्त करने के लिए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाग लिया।
चिंतन शिविर के समापन पर डीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ. कैलाश सी. पेटकर ने कार्यक्रम भी शामिल गणमान्य व्यक्तियों, आयोजकों, सभी हितधारकों, प्रेस और मीडिया कर्मियों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।
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