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IICA और CMAI ने डीकार्बोनाइजेशन की क्षमता बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) और कार्बन मार्केट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) ने नई दिल्ली में भारत के कार्बन बाजारों को मजबूत करने और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस ऐतिहासिक समझौते की घोषणा 4 फरवरी को आईआईसीए-सीएमएआई की वैश्विक और भारतीय कार्बन बाजारों पर मास्टरक्लास के उद्घाटन दिवस पर की गई। इस मास्टरक्लास में भारत सरकार के सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भाग लिया और भारत के आर्थिक एवं पर्यावरणीय भविष्य को आकार देने में जैव ईंधन और हरित हाइड्रोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

उन्होंने बायो बिटुमिन, बायो एविएशन-फ्यूल, बायो सीएनजी से संबंधित पायलट प्रोजेक्ट्स को साझा किया तथा इस बात पर प्रकाश डाला “ज्ञान को धन में बदलना ही भविष्य है और कोई भी सामग्री बेकार नहीं होती”। पीपीपी के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने साझा किया कि “हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है”। केंद्रीय मंत्री ने हाइड्रोजन की कीमत 1 डॉलर प्रति किलोग्राम करने के अपने दृष्टिकोण को भी साझा किया, जिसके बारे में उन्हें विश्वास है कि भारत इस क्षेत्र में अपने अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास संबंधी पहलों के कारण इसे हासिल करने वाला अग्रणी देश होगा। जैव ईंधन और वैकल्पिक ईंधन से संबंधित ऐतिहासिक पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि यद्यपि पूंजी और प्रौद्योगिकी की प्रारंभिक लागत अधिक होती है, लेकिन वर्तमान में महत्वपूर्ण अनुसंधान चल रहे हैं जो अंततः इसकी वास्तविक क्षमता को सामने लाएंगे। उन्होंने एक विविध जैव ईंधन क्षेत्र विकसित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर भी प्रकाश डाला, एक स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा परिदृश्य बनाने के लिए विभिन्न ईंधनों की विशाल क्षमता को स्वीकार करते हुए कहा कि जल्द ही भारत एक ग्रीन हाइड्रोजन निर्यातक देश बन जाएगा। अंत में, उन्होंने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) गठबंधन और इस क्षेत्र में क्षमता निर्माण पहल शुरू करने के लिए संगठन को बधाई दी।

आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख डॉ. गरिमा दाधीच ने कहा कि डीकार्बोनाइजेशन में आईआईसीए सर्टिफिकेट प्रोग्राम का उद्देश्य जलवायु न्यूनीकरण के लिए कार्बन ऑफसेट तंत्र विकसित करने के लिए उन्नत विशेषज्ञता वाले कॉरपोरेट्स का एक समूह बनाना और साथ ही उनके परिचालन को डीकार्बोनाइज करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति को एकीकृत करना है।

सीएमएआई के अध्यक्ष मनीष डबकरा ने कहा कि आईआईसीए के साथ समझौता ज्ञापन भारत में कार्बन बाजारों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण कार्यक्रम, अनुसंधान के अवसर, कार्यशालाएं और सम्मेलन टिकाऊ व्यावसायिक पहलों को गति देने का एक बड़ा हिस्सा हैं। सीएमएआई इस क्षेत्र में एक सफल साझेदारी की उम्मीद कर रहा है। सीएमएआई के महासचिव रोहित कुमार ने कहा कि इस क्षेत्र में जागरूकता एक बड़ी चुनौती रही है। सीएमएआई की उद्योग विशेषज्ञता को आईआईसीए की संस्थागत ताकत के साथ मिलाकर, सहयोग का उद्देश्य प्रभावी शिक्षण अवसर पैदा करना है जो भारत को निम्न कार्बन अर्थव्यवस्था में बदलने में तेजी लाने में मदद करेगा।

इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य उद्योग के पेशेवरों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों को भारत के उभरते कार्बन बाजारों में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक ज्ञान व विशेषज्ञता से लैस करना है। सीएमएआई, एक अग्रणी उद्योग संघ है जो टिकाऊ व्यापार पहलों को गति देने पर केंद्रित है और भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र की वृद्धि और विकास का समर्थन करने के लिए कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तहत एक थिंक टैंक आईआईसीए के लिए ज्ञान भागीदार के रूप में काम करेगा।

इस समझौते के तहत, सीएमएआई और आईआईसीए निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग करेंगे:

प्रशिक्षण कार्यक्रम: कार्बन बाज़ार, निम्न कार्बन औद्योगिक समाधान एवं टिकाऊ वित्त पर पाठ्यक्रम विकसित करना और वितरित करना।
संयुक्त अनुसंधान: डीकार्बोनाइजेशन रणनीतियों और कार्बन ट्रेडिंग तंत्र संबंधी अध्ययन करना और जानकारियों को प्रकाशित करना।
कार्यशालाएं और सम्मेलन: उद्योग के हितधारकों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करना।
पॉलिसी एडवोकेसी: भारत के नेट जीरो की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाले नियामक और नीतिगत ढांचे का समर्थन करना।

मास्टरक्लास के पहले दिन प्रमुख कॉरपोरेट्स, पीएसयू के 70 से अधिक पेशेवरों के साथ-साथ सरकारी निकायों, दूतावासों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। वैश्विक और भारतीय कार्बन बाजारों पर मास्टरक्लास का आयोजन आईआईसीए द्वारा भारत जलवायु सप्ताह के हिस्से के रूप में किया जा रहा है। आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की सीनियर रिसर्च एसोसिएट शिवांगी वशिष्ठ ने केस-स्टडी आधारित चर्चा का नेतृत्व किया, जिससे प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ी। मास्टरक्लास के पहले दिन का समापन ईआरएम इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर के एक ज्ञानवर्धक सत्र के साथ हुआ। मास्टरक्लास के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजारों पर कई सत्र आयोजित किए जाएंगे।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) के बारे में:

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (आईआईसीए), कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में एक स्वायत्त संस्थान है। स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (एसबीई) आईआईसीए में एक विशेषीकृत कार्यक्षेत्र है जो पर्यावरण-सामाजिक-शासन (ईएसजी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर), टिकाऊ वित्त, व्यवसाय एवं जैव विविधता संरक्षण, व्यवसाय और मानवाधिकार, जिम्मेदारीपूर्ण व्यापार, ईएसजी लेखा परीक्षा और आश्वासन व अन्य संबद्ध क्षेत्रों के दूरदर्शी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जिम्मेदारीपूर्ण व्यावसायिक आचरण को बढ़ावा देता है।

कार्बन मार्केट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के बारे में:

कार्बन मार्केट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) एक प्रमुख गैर-लाभकारी उद्योग समूह है जो हार्ड-टू-एबेट क्षेत्रों को डीकार्बोनाइज करके भारत को नेट-जीरो भविष्य की ओर ले जाने में मदद कर रहा है। एमओईएफसीसी, एमओपी, एमएनआरई और नीति आयोग जैसे प्रमुख मंत्रालयों के साथ सहयोग करते हुए, सीएमएआई पॉलिसी एडवोकेसी, क्षमता निर्माण और ज्ञान समर्थन प्रदान करता है।

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