हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने की अमावस्या 21 जून को आ रही है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस पर्व का विशेष महत्व है। इसे हलहारिणी अमावस्या कहते हैं। इस दिन हल और खेती के अन्य उपकरणों की पूजा की जाती है। क्योंकि इस अमावस्या के बाद वर्षा ऋतु आती है। आषाढ़ अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण का विशेष महत्व होता है। इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस पर्व पर दान करने से पुण्य मिलता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार सूर्यग्रहण होने से राशि अनुसार किए गए दान का विशेष महत्व रहेगा।
इस बार आषाढ़ महीने की अमावस्या रविवार को है। ज्योतिष के संहिता ग्रंथों के अनुसार रविवार को अमवास्या होना अशुभ माना जाता है। इस स्थिति का देश-दुनिया पर अशुभ असर पड़ता है। इस तिथि पर तीर्थ और पवित्र नदियों में नहाने के साथ ही दान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। आषाढ़ अमावस्या पर ग्रहों की विशेष स्थिति बनने से इस दिन पितरों की विशेष पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। पितरों के लिए इस दिन की गई पूजा से कुंडली में ग्रहों की स्थिति से बने पितृ दोष का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
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सूर्यग्रहण खत्म होने के बाद करें स्नान दान
रविवार को होने वाले सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले यानी शनिवार की रात को 10 बजे से ही शुरू हो जाएग जो कि ग्रहण के साथ दोपहर 2.30 पर खत्म होगा। इसलिए सुबह सामान्य स्नान करें। सुबह दान और पूजा-पाठ नहीं किए जा सकेंगे। लेकिन ग्रहण खत्म होने के बाद किए गए दान का विशेष महत्व रहेगा।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या करें
– रविवार को ग्रहण शुरू होने पहले नहा लें। इसके बाद ग्रहण के दौरान पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पूजा-पाठ करें।
– ग्रहण के दौरान गाय के घी का दीपक लगाएं। श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प लें। फिर ग्रहण खत्म होने पर संकल्प के अनुसार चीजों का दान करें। इसके बाद गाय को हरी घास खिलाएं, कुत्तों और कौवों को रोटी खिलाएं।
– अमावस्या पर ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र या भगवान शिव के नाम का जाप करें। ग्रहण खत्म होने के बाद फिर से नहाना चाहिए। ग्रंथों के अनुसार ऐसा करना जरूरी है।
– ग्रहण खत्म होने के बाद अमावस्या तिथि के दौरान ब्राह्मण भोजन करवा सकते हैं। संभव ना हो तो किसी मंदिर में आटा, घी, दक्षिणा, कपड़े या अन्य जरूरी चीजें दान कर सकते हैं।
12 राशियां के अनुसार दान
मेष : लाल कपड़े, गेहूं और तिल का दान करना शुभ रहेगा। तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है।
वृष : सूती कपड़ों का दान करें। जल, दूध और सफेद तिल का दान करना चाहिए।
मिथुन : गाय को हरी घास खिलाएं। श्रद्धा अनुसार गणेश मंदिर में दान करें।
कर्क : गंगाजल, दूध से बनी मिठाइयां और सफेद कपड़े दान करें।
सिंह : लाल कपड़े, कंबल या चादर का दान करें।
कन्या : हरे मूंग, धान, कांसे के बर्तन या हरे कपड़ों का दान करें।
तुला : किसी मंदिर में फल, रुई या घी का दान करें।
वृश्चिक : भूमि, लाल वस्त्र, सोना, तांबा, केसर, कस्तूरी का दान करना चाहिए।
धनु : मंदिर में हल्दी, चने की दाल का दान करें।
मकर : कंबल और काले तिल का दान करें।
कुंभ : तेल, तिल, नीले-काले कपड़े, ऊनी कपड़े और लोहे का दान करें।
मीन : पीली चीजें, धर्मग्रंथ, शहद, भूमि, दूध देने वाली गाय, पीला चंदन, पीले कपड़े दान कर सकते हैं।
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