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देश में अक्षय ऊर्जा का केंद्र बन रहा है गुजरात

गुजरात उन कुछ राज्यों में से एक है, जिन्होंने अक्षय ऊर्जा की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं। देश के बाकी राज्य इस क्षेत्र में गुजरात से कई कदम पीछे है। राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों से यह बहुत स्पष्ट है कि वे उद्योग और आर्थिक दृष्टि से कितना भी विकास करें, अक्षय ऊर्जा और सतत विकास सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।

यह ऐसी ऊर्जा है जो प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर करती है। इसमें सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन, ज्वार, जल और बायोमास के विभिन्न प्रकारों को शामिल किया जाता है। उल्लेखनीय है कि यह कभी भी समाप्त नहीं हो सकती है और इसे लगातार नवीनीकृत किया जाता है। नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन, ऊर्जा के परंपरागत स्रोतों (जो कि दुनिया के काफी सीमित क्षेत्र में मौजूद हैं) की अपेक्षा काफी विस्तृत भू-भाग में फैले हुए हैं और ये सभी देशों को काफी आसानी हो उपलब्ध हो सकते हैं।

हरित ऊर्जा यानि ग्रीन पावर वह बिजली होती है जिसे सूर्य, पवन, भूतापीय, बायोगैस, बायोमास एवं कम प्रभाव वाले छोटे पनबिजली संयंत्र से उत्पन्न किया जाये।

ऊर्जा क्षेत्र में, पारंपरिक ऊर्जा प्रणालियों के कारण होने वाले प्रदूषण को बदलने के लिए आज बड़ी संख्या में अक्षय ऊर्जा स्रोत मौजूद हैं। गुजरात ने बेहतर और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए कई अहम निर्णय लिए हैं।

गुजरात सरकार ने जून 2021 में ‘जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना’ का अनावरण किया। यह पूरी योजना राज्य के जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा तैयार की गई है जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा संरक्षण वानिकी, तटीय क्षेत्र, आदिवासी क्षेत्र, पशुपालन, कृषि और स्वास्थ्य जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

पर्यावरण में दिन-ब-दिन बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण के कारण समय की यही आवश्यकता है कि हम परिवहन के ऐसे स्थाई तरीके को अपनाएं जो हमें प्रकृति की रक्षा करने में मदद कर सके। इस दिशा में निर्णायक कदम आगे बढ़ाते हुए, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी ने 22 जून, 2021 को गुजरात इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2021 की शुरुआत की। गुजरात पूरे देश में ऑटोमोबाइल हब के रूप में प्रसिद्ध है। आने वाले वर्षों में गुजरात का लक्ष्य है कि उसे इलेक्ट्रिक वाहन हब के रूप में पहचाना जाए। गुजरात को एक ऐतिहासिक परिवहन केंद्र बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने ई-वाहन नीति की घोषणा की है। इस नीति का लक्ष्य अगले 4 वर्षों में गुजरात की सड़कों पर 2 लाख इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का है। अनुमान है कि ई-वाहनों के उपयोग से पर्यावरण में लगभग 6 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस प्रकार, यह वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करेगा और पर्यावरण को सुरक्षित रखेगा।

विजय रूपाणी ने कहा कि इससे नई ई-वाहन प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन मिलेगा और ई-वाहन चलाने, बेचने, सर्विसिंग और चार्जिंग के क्षेत्र में रोज़गार के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी। आने वाले 4 साल में गुजरात की सड़कों पर करीब 2 लाख इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ेंगे, जिसमें 1 लाख 10 हजार टू व्हीलर, 70 हजार थ्री व्हीलर और 20 हजार फॉर व्हीलर होंगे। अन्य वाहनों की तुलना में ई-वाहनों में प्रति किलोमीटर ख़र्च 30 से 50 प्रतिशत कम है। ऐसा अनुमान है कि ई-वाहनों से आने वाले 4 वर्षों में 5 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत होगी। राज्य सरकार ई-वाहनों की खरीद के लिए 10,000 रुपये प्रति किलोवाट रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी जो देश के अन्य राज्यों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी से दोगुना है। इस उद्देश्य के लिए राज्य अगले चार वर्षों में 870 करोड़ रुपये की लागत वहन करेगा। यह नीति चार मुख्य बिंदुओं पर बल देती है:-

राज्य में ई-वाहनों के उपयोग को लोकप्रिय बनाना,
गुजरात को ई-वाहन निर्माण का केंद्र बनाना
प्रदूषण कम करना और पर्यावरण की रक्षा करना और
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में युवा स्टार्टअप और निवेशकों को प्रोत्साहित करना

वर्तमान में ई-वाहनों की चार्जिंग के लिए राज्य में 278 चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। अब प्रदेश में 250 नए चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे और इसके साथ ही राज्य में कुल 528 चार्जिंग स्टेशनों का इंफ्रास्ट्रक्चर हो जाएगा। भारत की सबसे बड़ी बिजली कंपनी टाटा पावर ने हाल ही में केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में पहला डीसी फास्ट इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जर स्थापित किया है। Tata Power ने गुजरात में EV उपयोगकर्ताओं के लिए कुल 21 चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराए हैं।

एनर्जी पार्क- नई सौर नीति 2020 के तहत गुजरात में 2022 तक 30 हजार मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य के साथ अधिक ऊर्जा और सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। पिछले साल पीएम मोदी ने दुनिया के सबसे बड़े हाइब्रिड प्लांट की आधारशिला रखी थी। कच्छ जो लगभग 30,000MW हाइब्रिड (सौर और पवन) अक्षय ऊर्जा उत्पन्न करेगा और 72,600 हेक्टेयर में फैला हुआ है। अनुमान है कि इस परियोजना पर 1.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। अक्षय ऊर्जा पार्क को दो जोन में बांटा जाएगा। पहला 49,600 हेक्टेयर का हाइब्रिड पार्क जोन होगा जिसमें 24,800 मेगावाट पवन और सौर ऊर्जा संयंत्र होंगे, जबकि दूसरा पवन पार्क होगा। यह पार्क अगले साल तक बनकर तैयार हो जाना है।

प्रदेश में फिलहाल 800 मेगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन होता है, जबकि 11 हजार मेगावाट की क्षमता विकसित की जा चुकी है। पाटन में चारंका सोलर पार्क की क्षमता का विस्तार किया गया है और धोलेरा में 1000 मेगावाट सौर पार्क और राघनेस्दा में 700 मेगावाट सौर पार्क के लिए भी काम चल रहा है। जलवायु परिवर्तन के इस युग में जंगल बचाना और पानी का संरक्षण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जंगल और पानी- हरित ऊर्जा के अन्य स्रोतों को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति का संरक्षण भी ज़रूरी है। अगर हम प्रकृति का संरक्षण नहीं करेंगे तो यह सब बेकार हो जाएगा। भारत के वन सर्वेक्षण 2019 के अनुसार, गुजरात का हरित क्षेत्र लगभग 100 वर्ग किमी बढ़ गया है। गुजरात में 14,700 वर्ग किलोमीटर (किमी) का वन क्षेत्र है, जिसमें से 378 वर्ग किमी बहुत घने जंगल हैं। गुजरात देश में वन क्षेत्र में टॉप 10 राज्यों की सूची में आता है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से गुजरात में पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के लिए 1,072 करोड़ रुपये की एक परियोजना विकसित की जा रही है। गुजरात ने ‘सुजलाम सुफलाम-जैसे जल अभियान’, के माध्यम से नीति आयोग के जल प्रबंधन सूचकांक में लगातार तीन साल तक शीर्ष स्थान हासिल किया है। इस अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों के माध्यम से जल संग्रहण क्षमता को 42,064 लाख क्यूबिक फीट तक बढ़ाया गया है।

रिलायंस, अदानी पावर लिमिटेड और टाटा पावर जैसे दिग्गजों के सहयोग से, गुजरात क्लियर ऊर्जा के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। मुकेश अंबानी ने हाल ही में घोषणा की है कि आरआईएल अगले तीन वर्षों में एक नए हरित और स्वच्छ ऊर्जा व्यवसाय में 75,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने हाल ही में घोषणा की है कि आरआईएल गुजरात के जामनगर में 5,000 एकड़ में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स विकसित करेगी।

इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) द्वारा जारी 2019 की एक रिपोर्ट में यह ज़िक्र किया गया है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में गुजरात एक अग्रणी राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) के अधिकारियों के अनुसार, COVID-19 के प्रकोप के बावजूद, गुजरात चालू वित्त वर्ष में अक्षय ऊर्जा में अपनी स्थापित क्षमता को 450MW तक बढ़ाने में कामयाब रहा है।

गुजरात ने 2020 में भारत के संचयी ऊर्जा में 880MW और रूफटॉप सौर ऊर्जा में 360MW का योगदान दिया है। पिछले वर्ष में 40MW पवन ऊर्जा को जोड़ा गया है। ऊर्जा एवं पेट्रोरसायन विभाग की प्रमुख सचिव ममता वर्मा ने कहा कि राज्य की वर्तमान में अक्षय ऊर्जा स्रोतों- सौर, पवन, जल विद्युत, बायोमास से कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 13,152 मेगावाट है।

अगले 3-5 वर्षों में, गुजरात निश्चित रूप से अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा। अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करने के लिए गुजरात की स्थापित क्षमता 2025 तक 38,000 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 61,000 मेगावाट होने की उम्मीद है।
पिछले 12 वर्षों में, गुजरात में अक्षय ऊर्जा क्षमता मेगा परियोजनाओं के माध्यम से कई गुना बढ़ गई है। निश्चित तौर पर गुजरात, भारत के सबसे बेहतरीन हरित ऊर्जा का केंद्र बन रहा है।

Khushi Bhargav

I am Khushi Bhargav a passionate Content Writer at Vikral News, who loves to share informative and engaging content on Trending News, Lifestyle, Entertainment, Current Affairs, and Viral Stories.

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