20 सितंबर को जारी किए गए ईपीएफओ के अनंतिम पेरोल डेटा में बताया गया है कि ईपीएफओ ने जुलाई, 2022 के महीने में 18.23 लाख शुद्ध सब्सक्राइबर जोड़े हैं। इन पेरोल आंकड़ों की साल-दर-साल तुलना बताती है कि पिछले साल यानी 2021 की समान अवधि के मुकाबले जुलाई 2022 में सब्सक्राइबर्स में 24.48 फीसदी की शुद्ध बढ़ोतरी हुई है।
इस महीने के दौरान जोड़े गए कुल 18.23 लाख सब्सक्राइबर्स में से लगभग 10.58 लाख नए सदस्य पहली बार ईपीएफओ के सामाजिक सुरक्षा कवर में आए हैं। ईपीएफओ में शामिल होने वाले नए सदस्यों के आंकड़ों में अप्रैल, 2022 से ही बढ़ोतरी का चलन दिखाई दिया है। जोड़े गए 10.58 लाख नए सब्सक्राइबर्स में से लगभग 57.69 प्रतिशत 18-25 के बीच के आयु वर्ग के हैं। इससे पता चलता है कि पहली बार नौकरी चाहने वाले अपनी शिक्षा के बाद बड़ी संख्या में संगठित क्षेत्र के कार्यबल में शामिल हो रहे हैं और संगठित क्षेत्र में नई नौकरियां बड़े पैमाने पर देश के युवाओं को जा रही हैं।
इस महीने के दौरान तकरीबन 4.07 लाख सब्सक्राइबर्स ईपीएफओ से बाहर हो गए और 11.72 लाख सदस्य बाहर जाकर दोबारा ईपीएफओ में शामिल हो गए। इन सदस्यों ने अंतिम सेटलमेंट का विकल्प चुनने के बजाय धन के ट्रांसफर के जरिए अपनी सदस्यता बरकरार रखने का विकल्प चुना है। इसका श्रेय ईपीएफओ द्वारा निरंतर और निर्बाध सेवा वितरण के लिए उठाए गई विभिन्न ई-पहलों को दिया जा सकता है।
पेरोल डेटा के जेंडर-वार विश्लेषण से संकेत मिलता है कि जुलाई, 2022 में शुद्ध महिला सदस्यों का नामांकन 4.06 लाख रहा है। नामांकन के आंकड़ों की साल-दर-साल तुलना से पता चलता है कि बीते साल जुलाई, 2021 के दौरान नई महिला सदस्यों की तुलना में जुलाई, 2022 में संगठित कार्यबल में महिलाओं की नई सदस्यता में 34.84 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
इस माह के दौरान ईपीएफओ में शामिल होने वाले कुल नए सदस्यों में महिला कार्यबल का नामांकन 27.54 प्रतिशत पर दर्ज किया गया, जो बीते 12 महीनों में सबसे ज्यादा है। ये इशारा करता है कि जहां तक ईपीएफओ में शामिल होने वाले नए सदस्यों का सवाल है, तो संगठित कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।
राज्य-वार पेरोल के आंकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि तमिलनाडु, दिल्ली, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों में महीने-दर-महीने शुद्ध सदस्य वृद्धि का चलन देखा गया है। इस महीने के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली राज्य तकरीबन 12.46 लाख शुद्ध सब्सक्राइबर्स को जोड़कर आगे रहे हैं, जो कि तमाम आयु वर्गों में कुल शुद्ध वेतन वृद्धि का 68.36 प्रतिशत है।
उद्योग-वार पेरोल डेटा का वर्गीकरण दिखाता है कि इस महीने के दौरान कुल सदस्यता वृद्धि का 46.20 प्रतिशत हिस्सा मुख्य रूप से दो श्रेणियों से आया, यानी – ‘विशेषज्ञ सेवाएं’ (जिनमें श्रमशक्ति एजेंसियां, निजी सुरक्षा एजेंसियां और छोटे ठेकेदार आदि शामिल हैं) और ‘व्यापारिक-वाणिज्यिक प्रतिष्ठान।’ पिछले महीने के उद्योग-वार आंकड़ों की तुलना में ‘स्कूलों’, ‘भवन और निर्माण उद्योग’, ‘वित्तीय प्रतिष्ठान’ आदि जैसे उद्योगों में ऊंचे नामांकन देखे गए हैं।
ये पेरोल डेटा अनंतिम है क्योंकि डेटा निर्माण एक निरंतर क्रिया है, क्योंकि कर्मचारी रिकॉर्ड को अपडेट करना भी एक निरंतर प्रक्रिया है। पिछला डेटा इसलिए हर महीने अपडेट किया जाता है। अप्रैल-2018 के महीने से, ईपीएफओ सितंबर, 2017 की अवधि को कवर करते हुए पेरोल डेटा जारी कर रहा है। मासिक पेरोल डेटा में, आधार मान्य यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) के जरिए पहली बार ईपीएफओ में शामिल होने वाले सदस्यों की संख्या, ईपीएफओ की कवरेज से बाहर जाने वाले मौजूदा सदस्यों की संख्या और बाहर होकर वापस जुड़ने वाले सदस्यों की संख्या को शुद्ध मासिक पेरोल संख्या तक पहुंचने के लिए लिया जाता है।
आजकल स्मार्टफोन के व्यापक इस्तेमाल से ईपीएफओ ने मोबाइल गवर्नेंस के जरिए अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। ईपीएफओ अब सदस्यों की मदद के लिए ट्विटर, व्हाट्सएप और फेसबुक पर भी उपलब्ध है।
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