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DSIR के पेटेंट अधिग्रहण और सहयोगात्मक अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास (पेस) कार्यक्रम के तहत परियोजना समझौतों पर हस्ताक्षर

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) का पेस कार्यक्रम भारतीय उद्योगों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है। यह नवीन खोज कार्यों पर जोर देते हुए औद्योगिक आवश्यकताओं तथा उत्पादों और प्रक्रिया के व्यावसायीकरण में नई प्रौद्योगिकियों के विकास कार्यों में सहायता देता है। इस कार्यक्रम में व्यावहारिक इस्तेमाल के साथ ही विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्रों के लक्षित प्रस्तावों को प्रोत्साहित किया जाता है। कार्यक्रम के तहत अपूर्ण औद्योगिक आवश्यकताएं अवधारणा प्रमाणन प्रदर्शित करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मदद मुहैया कराई जाती है। कार्यक्रम में एक से तीन वर्ष की अवधि वाली परियोजनाओं को सहायता दी जाती है।

पेस कार्यक्रम के अंतर्गत, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने मेसर्स देवाशीष पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड (डीपीपीएल) मुंबई और मेसर्स जीपीएस रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु तथा आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) पुणे के साथ 20 नवंबर 2024 को त्रिपक्षीय समझौता किया है।

इस परियोजना के तहत देवाशीष पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड मुंबई का लक्ष्य कंपाउन्डेड इलास्टोमर्स विकसित करना और विभिन्न उपयोगों के लिए उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है। मेसर्स जीपीएस रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु, आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) पुणे के सहयोग से एनारोबिक कवक का उपयोग कर कृषि अवशेषों से उन्नत माइक्रोबायल मीथेन उत्पादन के आरंभिक परीक्षणों को उन्नत स्तर पर बढ़ाना और संचालित करना चाहता है।

डीएसआईआर सचिव और सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी की उपस्थिति में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। आयोजन में पीएसीई के प्रमुख वैज्ञानिक-जी डॉ. विपिन चंद्र शुक्ला, राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (एनआरडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक कमोडोर (सेवानिवृत्त) अमित रस्तोगी, आगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (एआरआई) पुणे के निदेशक डॉ. प्रशांत ढकेफालकर, मेसर्स देवाशीष पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड (डीपीपीएल) मुंबई के निदेशक और सीएफओ आदित्य मोदी, जीपीएस रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु के सीटीओ रवि गोमतम, डीएसआईआर के वैज्ञानिक-ई डॉ. एम.एस. शशि कुमार, तथा डॉ. सुमन मजूमदार, और एनआरडीसी और डीएसआईआर के अन्य सदस्य शामिल थे।

डीएसआईआर सचिव और सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने अपने संबोधन में कहा कि पेस कार्यक्रम भारत में नवाचार और सहयोगात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने की डीएसआईआर की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पहल द्वारा संगठन का लक्ष्य नए उत्पादों, प्रक्रियाओं और समाधान के विकास को उत्प्रेरित करना है जो तकनीकी रूप से मजबूत और व्यावसायीकरण के लिए उन्मुख हैं।

डॉ. कलैसेल्वी ने देवाशीष पॉलिमर्स प्राइवेट लिमिटेड, जीपीएस रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड, अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट को परियोजना शुरू करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान और भारत के विकास लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। डॉ. कलैसेल्वी ने यह भी कहा कि ऐसी परियोजनाएं उद्योग-अकादमिक भागीदारी बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जिससे स्थायी समाधान तैयार किए जा सकें और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सामाजिक प्रयासों से राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया जा सके।

वैज्ञानिक-जी और पेस प्रमुख डॉ. विपिन चंद्र शुक्ला ने कहा कि डीएसआईआर उन नवीन विचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जो प्रभावशाली समाधान देते हैं। उन्होंने कहा कि यह मिशन इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि सहयोग द्वारा ही हम भारत के लिए स्थायी औद्योगिक विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकते हैं।

देवाशीष पॉलिमर प्राइवेट लिमिटेड मुंबई के निदेशक और सीएफओ आदित्य मोदी और रिन्यूएबल्स प्राइवेट लिमिटेड बेंगलुरु के सीटीओ रवि गोमतम ने डीएसआईआर के पेस कार्यक्रम की संयुक्त रूप से प्रशंसा की और उद्योगों के लिए इसे परिवर्तनकारी कार्यक्रम बताया जो नवाचार को बढ़ावा देने और वास्तविक चुनौतियों के समाधान विकसित करने में शिक्षाविदों और अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के साथ सहयोग करता है। उन्होंने डीएसआईआर की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ये नवाचार बढ़ाने के साथ ही भारत के तकनीकी और आर्थिक परिदृश्य को सुदृढ़ कर रहा है।

वैज्ञानिक-ई और पेस कार्यक्रम के सदस्य सचिव डॉ. एम.एस. शशि कुमार ने डीएसआईआर सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी और अन्य सभी उपस्थित लोगों को धन्यवाद ज्ञापन कर समारोह का समापन किया।

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