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DPIIT ने ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों के समेकन’ पर कार्यशाला आयोजित की

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने 3 अप्रैल 2024 को नई दिल्ली में ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) पर आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों के समेकन’ पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला की अध्यक्षता डीपीआईआईटी के अपर सचिव (लॉजिस्टिक्स) राजीव सिंह ठाकुर ने की, जिसका उद्देश्य आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों को पीएम गतिशक्ति एनएमपी पर जीआईएस डेटा लेयर को शामिल करना, योजना निर्माण के लिए मंच का उपयोग करने के लाभों के बारे में जागरूक करना और इस संबंध में हुई प्रगति की समीक्षा करना था।

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अपर सचिव राजीव सिंह ठाकुर ने समेकित योजना और सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे के समग्र विकास के लिए अपनाए जाने वाले पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों को रेखांकित किया। उन्होंने सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों को शामिल करते हुए एकीकृत योजना और सामंजस्यपूर्ण परियोजना कार्यान्वयन को बढ़ावा देकर, भारत के बुनियादी ढांचे को नया आकार देने के लिए एक व्यापक और टिकाऊ रणनीति के रूप में पीएमजीएस-एनएमपी पर बल दिया। परियोजना निर्माण के साथ-साथ ‘कार्य करने की सुगमता’ और ‘जीवनयापन की सुगमता’ में निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने के लिए इस “समग्र-सरकार” के दृष्टिकोण को अपनाया गया है।

डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव डॉ. सुरेंद्र कुमार अहिरवार ने उल्लेख किया कि आर्थिक मंत्रालयों द्वारा पीएम गतिशक्ति एनएमपी को अपनाया जाना न केवल अपने स्वयं के बुनियादी ढांचे/योजनाओं की कुशल डेटा संचालित योजना के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बुनियादी ढांचे/सामाजिक मंत्रालयों के साथ-साथ राज्य/केंद्र-शासित प्रदेश द्वारा अवसंरचना/स्कीमों की योजना बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव ई. श्रीनिवास ने कहा कि पीएमजीएस-एनएमपी पर आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों का उक्त समेकन गतिशक्ति के मूल सिद्धांतों- तार्किक दक्षता, मल्टी मॉडिलिटी और आर्थिक हबों से बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

इस कार्यशाला में कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन और पेट्रोरसायन, उर्वरक, कोयला, वाणिज्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण, रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, आर्थिक मामले, राजस्व, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, खान, इस्पात, पृथ्वी विज्ञान और फार्मास्यूटिकल्स सहित 18 मंत्रालयों/विभागों का प्रतिनिधित्व करने वाले 32 से अधिक अधिकारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। बीआईएसएजी-एन और डीपीआईआईटी के लॉजिस्टिक्स प्रभाग के 20 से अधिक अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम की शुरुआत पीएम गतिशक्ति पर एक विचारशील वीडियो के साथ हुई, जिसके बाद डीपीआईआईटी के लॉजिस्टिक्स प्रभाग द्वारा एक व्यापक प्रस्तुति दी गई, जिसमें इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के अवलोकन, प्रगति, लाभ और भावी परिदृश्य पर प्रकाश डाला गया। तकनीकी भागीदार बीआईएसएजी-एन ने पीएमजीएस-एनएमपी के तकनीकी ढांचे और विभिन्न मंत्रालयों के लिए विकसित उपकरणों पर एक व्यावहारिक प्रस्तुति प्रदान की, जिससे प्रतिभागियों को इसकी विशेषताओं की व्यावहारिक समझ प्राप्त करने में मदद मिली।

इस कार्यशाला के मुख्य खंड में आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों/विभागों की प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिसमें पीएम गतिशक्ति को अंगीकार करने की उनकी स्थिति और दिए गए संकेतों के अनुरूप उठाए गए आवश्यक कदमों का प्रदर्शन किया गया था। इस संवादमूलक सत्र ने सर्वोत्तम तौर-तरीकों, चुनौतियों का सामना करने और संभावित समाधानों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान की, जिससे निर्बाध कार्यान्वयन के लिए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिला। इससे यह निष्कर्ष निकला कि मंत्रालयों/विभागों को सक्रिय रूप से पीएमजीएस-एनएमपी पर विभिन्न डेटा लेयर की पहचान कर उसे अपलोड करना चाहिए, डेटा प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित करनी चाहिए और पीएमजीएस-एनएमपी का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों की योजना बनाने और विशिष्ट योजना उपकरण विकसित करने के लिए क्षमता बढ़ानी चाहिए।

भावी परिदृश्य के रूप में विशिष्ट कार्य बिंदुओं को रेखांकित किया गया, जिसमें विश्लेषण के बाद युक्तियों की पहचान शामिल थी जिससे कि सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे के योजना निर्माण में पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों को तेजी से अपनाया जा सके।

पीएमजीएस-एनएमपी प्लेटफॉर्म के उपयोग से उपयोगकर्ताओं को लाभ प्राप्त होने के साथ-साथ शहरी परिवहन, सड़क मार्ग, रेलवे आदि जैसे अवसंरचना क्षेत्र में सफल उपयोग के मामले सामने आए हैं। पीएमजीएस-एनएमपी के उपयोग ने निजी क्षेत्र के लिए अवसंरचना निवेश के जोखिम को बहुत हद तक कम कर दिया है, मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों के लिए प्रचालनों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को विवेकसंगत बना दिया है। गतिशक्ति दृष्टिकोण उपयोगकर्ताओं को अधिकतम कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए आपदा प्रबंधन, सामाजिक सेक्टर की परिसंपत्तियों का स्थान, पर्यटन सर्किट के विकास आदि की योजना बनाने में भी मदद कर रहा है। अवसंरचना और सामाजिक सेक्टर के मंत्रालयों द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति को स्वीकार करते हुए, इस कार्यशाला में आर्थिक/उपयोगकर्ता मंत्रालयों को पीएमजीएस-एनएमपी प्लेटफॉर्म का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में सक्षम बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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