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DGGI और NFSU ने डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए

जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (DGGI) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) ने डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना करने के साथ-साथ डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में सूचनाओं एवं ज्ञान या जानकारियों के आदान-प्रदान, तकनीकी प्रगति और कौशल विकास के लिए एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस सहमति पत्र पर सुरजीत भुजबल, प्रधान महानिदेशक, डीजीजीआई और डॉ. जे.एम. व्यास, कुलपति, एनएफएसयू, गांधीनगर ने हस्ताक्षर किए।

डीजीजीआई संबंधित सूचनाओं के संग्रह और प्रसार के लिए और जीएसटी की चोरी रोकने हेतु आवश्यक उपाय करने के लिए केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अधीनस्‍थ शीर्ष खुफिया संगठन है। एनएफएसयू फोरेंसिक विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों में अध्ययन एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारत की संसद की स्‍वीकृति से स्थापित किया गया राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। एनएफएसयू फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में पहला एवं एकमात्र संस्थान है और उसके पास डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी है और इसके साथ ही डिजिटल साक्ष्य का अध्ययन एवं विश्लेषण करने की विशिष्‍ट क्षमता है। इसने विभिन्न राष्ट्रीय एजेंसियों जैसे कि प्रवर्तन निदेशालय, डीआरडीओ और केंद्रीय जांच ब्यूरो, इत्‍यादि के साथ-साथ कई देशों और उनके संस्थानों के साथ डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में सहयोग सुनिश्चित किया है।

सीबीआईसी की प्रमुख जांच शाखा होने के नाते डीजीजीआई बड़े पैमाने पर होने वाली कर चोरी का पता लगाने और फर्जी इनवॉयस या चालान वाले रैकेट का भंडाफोड़ करने एवं इन मामलों में कई मास्टरमाइंडों अथवा सरगना को गिरफ्तार करने के लिए डेटा विश्लेषणात्मक उपकरणों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों का व्यापक रूप से उपयोग करता है। यह एमओयू जांच एवं डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में डीजीजीआई के लिए काफी मददगार साबित होगा और प्रभावकारी अभियोग शुरू करने एवं दोषियों को सजा दिलाने में इस एजेंसी की सहायता करेगा। गंभीर कर अपराध करने वालों को त्वरित और प्रभावकारी सजा दिलाने से न केवल सरकारी राजस्व सुनिश्चित होता है और इसका रिसाव या लीकेज थम जाता है, बल्कि ईमानदार करदाताओं के लिए उचित कर व्यवस्था सुनिश्चित करके व्यापार को सुविधाजनक भी बनाता है। यह डीजीजीआई के लिए डिजिटल फोरेंसिक के क्षेत्र में आवश्यक भौतिक अवसंरचना, कौशल सेट और आवश्‍यक जानकारियां हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

इस सहमति पत्र से डीजीजीआई और एनएफएसयू को डिजिटल फोरेंसिक प्रयोगशालाओं की स्थापना करने के साथ-साथ अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहयोग करने और एक-दूसरे को तकनीकी सहायता प्रदान करने में काफी मदद मिलेगी।

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