विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया है कि दक्षिण चीन सागर के बारे में आचार संहिता, 1982 के समुद्री कानून से संबंधित संयुक्त राष्ट्र समझौते के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई भी बातचीत पूर्वाग्रह युक्त और किसी राष्ट्र के हित को ध्यान में रखते हुए नहीं होनी चाहिए। 11वीं पूर्व एशिया विदेश मंत्रियों की शिखर बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि हिन्द प्रशांत क्षेत्र के बारे में सदस्य देशों के बीच समान दृष्टिकोण बढ़ रहा है।
डॉक्टर जयशंकर ने म्यामां के बारे में आसियान देशों की पांच सूत्रीय सहमति का भी समर्थन किया और विशेष दूत की नियुक्ति का स्वागत किया। उन्होंने आसियान देशों में बढ़ती कोविड चुनौतियों का जिक्र किया और इसके लिए भारत के सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की। डॉक्टर जयशंकर ने कल आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक को भी संबोधित किया। उन्होंने आसियान बैठक में हुई चर्चा को सकारात्मक और लाभप्रद बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ… Read More
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय… Read More
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में ओडिशा के… Read More
केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज दूरसंचार विभाग की… Read More
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के कलबुर्गी में स्थित केंद्रीय कर्नाटक विश्वविद्यालय के 10वें… Read More
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को कर्नाटक के बीदर जिले के भालकी में श्री चन्नबासावाश्रम… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment