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नागर विमानन मंत्रालय ने जनता के परामर्श के लिये ड्रोन नियम, 2021 का मसौदा जारी किया

नागर विमानन मंत्रालय ने जनता के सुझाव जानने के लिये ड्रोन नियम, 2021 का संशोधित मसौदा जारी कर दिया है। विश्वास, स्व-प्रमाणन और गैर-दखलंदाजी वाली निगरानी के सिद्धांत पर आधारित, ड्रोन नियम, 2021, 12 मार्च, 2021 को जारी यूएएस नियम, 2021 का स्थान लेगा। लोगों के सुझाव प्राप्त करने की अंतिम तिथि पांच अगस्त, 2021 है।

ड्रोन नियम, 2021 के मसौदे की विशेष बातें इस प्रकार हैं:

मंजूरी रद्दः विशिष्ट प्राधिकार संख्या, विशिष्ट प्रोटोटाइप पहचान संख्या, अनुरूपता प्रमाणपत्र, रखरखाव प्रमाणपत्र, आयात क्लियरंस, मौजूदा ड्रोन की स्वीकृति, संचालन परमिट, अनुसंधान एवं विकास संगठन का प्राधिकार, छात्र रिमोट पायलट लाइसेंस, रिपोट पायलट प्रशिक्षक प्राधिकार, ड्रोन पोर्ट प्राधिकार, आदि।

फार्मों की संख्या 25 से घटाकर छह कर दी गई है।
शुल्क को न्यूनतम स्तर पर किया गया। ड्रोन के आकार से उसका कोई सम्बंध नहीं।
‘नो पर्मिशन–नो टेक-ऑफ’ (एनपीएनटी), वास्तविक समय में ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग जैसे सुरक्षा तत्‍वों को भविष्य में अधिसूचित किया जायेगा। इसके अनुपालन के लिये छह महीने का समय दिया जायेगा।
डिजिटल स्काई प्लेटफार्म को व्यापार अनुकूल एकल खिड़की ऑनलाइन प्रणाली के तौर पर विकसित किया जायेगा।
डिजीटल स्काई प्लेटफार्म में कम से कम दखलंदाजी होगी और ज्यादातर मंजूरी खुद तैयार हो जायेगी।
डिजीटल स्काई प्लेटफार्म पर हरे, पीले और लाल जोन के तौर पर वायुसीमा मानचित्र प्रदर्शित किया जायेगा।
पीले जोन का रकबा हवाई अड्डे की परिधि के हवाले से 45 किमी से घटाकर 12 किमी कर दिया गया।
हरे जोन के हवाले से नो-फ्लाइट अनुमति 400 फीट तक और 200 फीट हवाई अड्डे की परिधि के हवाले से यह रकबा आठ से 12 किमी तक किया गया।
माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यापारिक इस्तेमाल के लिये), नैनो ड्रोन और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये पायलट लाइसेंस दरकार नहीं होगा।
भारत में पंजीकृत विदेशी कंपनियों द्वारा ड्रोन संचालन के लिये कोई बाध्यता नहीं।
डीजीएफटी द्वारा ड्रोन और ड्रोन के पुर्जों के आयात को नियमित किया जायेगा।
पंजीकरण या लाइसेंस लेने के पहले सिक्योरिटी क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं।
अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र, विशिष्ट पहचान संख्या, पूर्वानुमति और रिमोट पायलट लाइसेंस की जरूरत नहीं।
ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन कवरेज को 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम किया गया। इसमें ड्रोन टैक्सी को भी शामिल किया गया है।
समस्त ड्रोन प्रशिक्षण और परीक्षण अधिकृत ड्रोन स्कूल करेगा। डीजीसीए प्रशिक्षण की शर्तें तय करेगा, ड्रोन स्कूलों के संचालन को देखेगा और ऑनलाइन पायलट लाइसेंस प्रदान करेगा।
उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया निभायेगा और उसके द्वारा अधिकृत संस्थायें प्रमाणपत्र देंगी।
निर्माता अपने ड्रोनों की विशिष्ट पहचान संख्या को डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर दे सकते हैं, जो स्व-प्रमाणन के जरिये होगा।
ड्रोनों के हस्तांतरण और पंजीकरण से हटाने के लिये आसान प्रक्रिया।
डीजीसीए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रशिक्षण प्रक्रिया नियम (टीपीएम) को डिजिटल स्काई प्लेटफार्म पर तय करेगा, जिसके जरिये इस्तेमाल करने वाले खुद निगरानी कर सकेंगे। जब तक तयशुदा प्रक्रिया से कुछ भिन्न मुद्दा न हो, तब तक अनुमति की कोई जरूरत नहीं।
ड्रोन नियम, 2021 के तहत अधिकतम जुर्माना घटाकर एक लाख रुपये कर दिया गया। बहरहाल, अन्य कानूनों की अवहेलना होने पर यह जुर्माना नहीं लगेगा।
माल ढुलाई करने वालों के लिये अलग से ड्रोन गलियारों का विकास।
व्यापार अनुकूल नियम बनाने के लिये ड्रोन संवर्धन परिषद् की स्थापना।

Dheeru Bhargav

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